
मनरेगा का सच: रोजगार गारंटी योजना चढ़ी भ्रष्टाचार की भेंट
मनरेगा का सच: रोजगार गारंटी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी, मजदूर बेरोजगार, कागजों पर काम, सरकारी खजाना खाली, जांच मांगी
मनरेगा बना अफसर-प्रधान का एटीएम मशीन, सरकारी धन की लूट का खुला खेल
मनरेगा बना अफसर-प्रधान का एटीएम, फर्जी मस्टररोल, बिना काम भुगतान, सरकारी धन लूटा, गांवों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग तेज
कुशीनगर। जनपद के विशुनपुरा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा सिंगापट्टी में मनरेगा योजना के तहत चल रहे मिट्टी कार्य में बड़ा घोटाला सामने आया है। मौके की तस्वीरें और ग्रामीणों की गवाही इस बात की गवाह हैं कि सरकारी योजनाओं का पैसा अब लालफीताशाही और भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यस्थल पर एक भी मजदूर मौजूद नहीं, फिर भी मनरेगा पोर्टल पर 137 मजदूरों की हाजिरी दर्ज दिखाई जा रही है।
यह खुला खेल न सिर्फ फर्जीवाड़े की पोल खोलता है, बल्कि गरीब मजदूरों के हक पर सीधी डकैती भी है। बिना काम के भुगतान, कागजों पर मजदूरी और सरकारी धन का बंदरबांट—ये सब भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इसी तरह योजनाएं लूटी जाती रहीं तो गांवों का विकास सिर्फ फाइलों में ही सिमट कर रह जाएगा।

बताया जाता है कि महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना का मुख्य उद्देश्य गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराकर पलायन रोकना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इसके तहत मिट्टी कार्य, तालाब, पोखरा, चकमार्ग, जलसंरक्षण, सिंचाई, वृक्षारोपण व भूमि सुधार जैसे स्थायी कार्य कराए जाते हैं।
लेकिन सिंगापट्टी का यह मामला मनरेगा की आत्मा पर करारा प्रहार है। ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि गरीबों का हक लौट सके और व्यवस्था पर भरोसा बहाल हो।

जमीन पर मजदूर नदारत, कागजों में खेल
कुशीनगर जनपद के विशुनपुरा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सभा सिंगापट्टी में मनरेगा योजना की हकीकत चौंकाने वाली है। 16 जनवरी को बांसी पिच से मदन गुप्ता के खेत तक चकमार्ग पर 24 मजदूर, हरीश कुशवाहा के घर से गंभीरिया बॉर्डर पिच पटरी पर 68 मजदूर और बंसी टोला से रामघाट बॉर्डर तक 39 मजदूरों से मिट्टी कार्य कराने का दावा किया गया।
लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि इन किसी भी स्थान पर न तो काम हुआ, न ही एक भी मजदूर नजर आया। इसके विपरीत, कागजों और फोटो के खेल में फर्जी हाजिरी दिखाकर लाखों रुपये की बंदरबांट की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल औपचारिकता निभाने के लिए फोटो खिंचवाई जाती हैं और पोर्टल पर फर्जी एंट्री कर सरकारी धन को बेखौफ लूटा जा रहा है।
इस पूरे खेल में रोजगार सेवक, पंचायत प्रतिनिधि और ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक के मनरेगा अधिकारियों की संलिप्तता बताई जा रही है।
आक्रोशित ग्रामीण कहते हैं, “हमारे पसीने की कमाई अधिकारी फोटो और कागजों के खेल से चट कर रहे हैं। मजदूरों को काम नहीं मिल रहा, सिर्फ उनके नाम पर लूट हो रही है।” ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
डीसी मनरेगा बोले—दोषी किसी कीमत पर नहीं बचेंगे
सिंगापट्टी प्रकरण पर जब डीसी मनरेगा राकेश कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, जनता के मन में सवाल यह है कि क्या यह जांच सचमुच भ्रष्टाचार पर प्रहार बनेगी या फिर हर बार की तरह फाइलें दफ्तरों की धूल में दबकर रह जाएंगी।
प्रदेश में पहले हुए मनरेगा घोटालों पर की गई कार्रवाई आज नजीर है, नजारा नहीं। बरेली में फर्जीवाड़ा सामने आने पर ग्राम प्रधान के वित्तीय अधिकार तत्काल सीज कर दिए गए थे। साथ ही प्रधान और संबंधित सचिवों के विरुद्ध सीडीओ द्वारा डीएम के आदेश पर कड़ी कार्रवाई की गई थी।
इसी तरह कानपुर-बिल्हौर के रहीमपुर-करीमपुर ग्राम पंचायत में लगभग 12 लाख रुपये के घोटाले पर बीडीओ, ग्राम प्रधान और तकनीकी सहायक के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। बीडीओ पर निलंबन की तलवार चली, तकनीकी सहायक, अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी और कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त की गईं तथा घोटाले की रकम वसूली के आदेश जारी हुए। बाद में बिल्हौर ब्लॉक में ग्राम प्रधान सहित 15 लोगों पर कार्रवाई हुई।
अब सिंगापट्टी की बारी है। जनता चाहती है कि यहां भी वही सख्ती दिखाई दे, ताकि मनरेगा फिर से गरीबों की उम्मीद बने, अफसर-प्रधानों का एटीएम नहीं।

हरदोई: प्रधान समेत 10 पर गिरी गाज
हरदोई के अजबागजाधरपुर गांव में मनरेगा घोटाले में 45 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता उजागर हुई है। जिला प्रशासन ने ग्राम प्रधान रीतू सहित दस कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराते हुए कड़ी वसूली के आदेश जारी किए हैं। कार्रवाई से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।
साहब! सिंगापट्टी तो एक बानगी
विशुनपुरा ब्लॉक का सिंगापट्टी गांव महज एक उदाहरण है। कुशीनगर जिले में मनरेगा की जमीन पर फर्जीवाड़ा चरम पर है, मजदूरों को दरकिनार कर कागजों में काम और भुगतान दिखाया जा रहा है। सिंगापट्टी में घोटाला उजागर होने के बाद अब सवाल है—क्या शासन-प्रशासन इस भ्रष्टाचार की फैक्ट्री पर नकेल कसेगा या जांच के नाम पर फाइलें टेबल दर टेबल घूमकर दफन हो जाएंगी?

