
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
कुशीनगर, 22 नवम्बर।
जनपद के राजस्व न्यायालयों में उ.प्र. राजस्व संहिता-2006 के अंतर्गत निर्धारित समय सीमा के बाद भी लम्बित मामलों का विवरण उपलब्ध न कराने पर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। अपर जिलाधिकारी वैभव मिश्रा ने इस गंभीर लापरवाही को संज्ञान में लेते हुए 22 पेशकारों का वेतन बाधित कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ADM द्वारा सभी पीठासीन अधिकारियों को RCCMS पोर्टल पर दर्ज समय सीमा पार कर चुके वादों की सूची निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद कई राजस्व न्यायालयों के पेशकार अब तक वांछित सूचना उपलब्ध कराने में विफल रहे। ADM ने स्पष्ट कहा कि यह रवैया पेशकारों की कार्यप्रणाली में गंभीर उदासीनता को दर्शाता है।
साप्ताहिक समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने भी इस लापरवाही पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए निर्देश दिया कि सभी पेशकारों तथा नायब तहसीलदार के पेशकार (R.K.) का वेतन तत्काल प्रभाव से रोका जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि समयबद्ध निस्तारण शासन की प्राथमिकता है, और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ADM द्वारा जिन पेशकारों का वेतन बाधित किया गया है, उनमें उपजिलाधिकारी पडरौना के पेशकार निसार अहमद, उपजिलाधिकारी खड्डा के अमानत हुसैन, तहसीलदार खड्डा के नर्वदा सिंह, नायब तहसीलदार खड्डा के अजीत कुमार (आर.के.), उपजिलाधिकारी कप्तानगंज के अनीश कुमार श्रीवास्तव, तहसीलदार कप्तानगंज के अभिषेक सिंह, नायब तहसीलदार कप्तानगंज के परमहंस (आर.के.), उपजिलाधिकारी हाटा के ब्रजेश पाठक, तहसीलदार हाटा की खुशबू श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार हाटा के कृष्ण प्रसाद, उपजिलाधिकारी कसया के सुनील कुमार, तहसीलदार कसया के राजकुमार गुप्ता, नायब तहसीलदार कसया के मार्कण्डेय मणि (आर.के.), उपजिलाधिकारी तमकुहीराज के वृजेश कुमार गौतम, तहसीलदार तमकुहीराज जितेन्द्र कुमार यादव, नायब तहसीलदार तरया तमकुहीराज के राम हरख यादव (आर.के.) सहित कुल 22 नाम शामिल हैं।
ADM ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक संबंधित पेशकार वांछित सूचना उपलब्ध नहीं कराते, उनका वेतन जारी नहीं किया जाएगा। सूचना प्रस्तुत करने के बाद ही वेतन आहरण की अनुमति दी जाएगी। साथ ही सभी पीठासीन अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा गया है कि अगली साप्ताहिक समीक्षा बैठक से पहले विवरण हर हाल में उपलब्ध कराएं, अन्यथा जिम्मेदारी स्वयं उनकी होगी।
प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई ने राजस्व न्यायालयों में व्याप्त शिथिलता को उजागर कर दिया है। उम्मीद है कि अब लंबित वादों के निस्तारण की गति तेज होगी और जनता को समय पर न्याय प्राप्त हो सकेगा।
