



विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर | बड़ी खबर
कुशीनगर जनपद से एक चौंकाने वाली और बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। खड्डा तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा जखनिया के सरेंह में आज शाम लगभग 5 बजे गन्ने के खेत में अचानक लगी आग ने किसानों की महीनों की मेहनत को पल भर में राख में बदल दिया। इस भीषण आग में दो किसानों की लगभग एक बीघा गन्ने की फसल पूरी तरह जलकर खाक हो गई, जिससे गांव में हड़कंप मच गया।
ग्रामीणों के अनुसार, घटना के पीछे पिकनिक मनाने आए कुछ अज्ञात युवकों की घोर लापरवाही सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि ये युवक खेत के आसपास बैठकर सिगरेट पी रहे थे। इसी दौरान सिगरेट की चिंगारी सूखे गन्ने के पत्तों में जा गिरी और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग भड़कते ही कथित युवक मौके से फरार हो गए, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
जब गांव के कुछ लोगों ने खेत की ओर धुआं उठता देखा तो शोर मचाया गया। शोर सुनते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर दौड़े और जान जोखिम में डालकर आग बुझाने में जुट गए। गांव के एक जागरूक व्यक्ति ने ट्रैक्टर से खेत को जोतकर आग को फैलने से रोका, वहीं अन्य ग्रामीणों ने पानी और मिट्टी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।
इस आगजनी में पूर्व विधायक दीपलाल भारती एवं सुभाष यादव, निवासी ग्राम जखनिया, की गन्ने की फसल को भारी क्षति पहुंची है। ग्रामीण महेंद्र यादव, राम सावरे, प्रेम प्रकाश, रोशनलाल भारती सहित कई लोगों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में अहम भूमिका निभाई।
सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी रवाना हुई, लेकिन खेत तक रास्ता न होने के कारण वाहन मौके तक नहीं पहुंच सका। हालांकि फायर ब्रिगेड की टीम ने पैदल पहुंचकर आग को पूरी तरह शांत कराया। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फायर सेफ्टी, अवैध पिकनिक और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन बाहरी लोग खेतों के आसपास पिकनिक मनाते हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई निगरानी नहीं की जाती। यह घटना महज एक दुर्घटना थी या जानबूझकर की गई लापरवाही—यह जांच का विषय है। सवाल यह है कि आखिर किसानों की फसल की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर इस गंभीर मामले में प्रशासन से तत्काल जांच, दोषियों की पहचान और पीड़ित किसानों को मुआवजा देने की मांग करता है। किसानों की मेहनत यूं ही जलती रहेगी या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी—यह अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा है।
