
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर।
कुशीनगर तथागत बुद्ध की पवित्र परिनिर्वाण भूमि पर एक बार फिर वही काला खेल उजागर हुआ है, जिसने पूरे जिले को शर्मसार कर दिया है। एनके गेस्ट हाउस, जहां देह व्यापार का अनैतिक कारोबार सालों से फल-फूल रहा है, शुक्रवार के छापेमारी में दो दर्जन से अधिक युवक-युवतियों के साथ पकड़ा गया।
लेकिन यह पहली बार नहीं — दो साल पहले 2023 में भी यही गेस्ट हाउस रंगरलियों का अड्डा बन चुका था और प्रशासन ने इसे सील कर दिया था।
अब बड़ा सवाल यह है—वर्ष 2023 में सील हुआ एनके गेस्ट हाउस आखिर किसके आदेश पर दोबारा खुला? किसकी छत्रछाया में गंदा है पर धंधा चल रहा था?
🔴 2023 में सील… फिर दोबारा कैसे खुल गया?
वर्ष 2023 में तत्कालीन एसडीएम रत्निका श्रीवास्तव और मौजूदा सीओ कसया कुंदन सिंह की मौजूदगी में पुलिस ने एनएच-28 किनारे स्थित एनके गेस्ट हाउस में छापा मारा था।
उस समय भी युवकों-युवतियों को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा गया और गेस्ट हाउस को मौके पर ही सील कर दिया गया था।
परंतु सील तुड़वाकर गेस्ट हाउस फिर कैसे खुल गया? किसने सरकारी ताला खुलवाया? कौन था जो कानून पर भारी पड़ गया?
यह आज भी सबसे बड़ा रहस्य बना हुआ है।
🔴 बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहा गेस्ट हाउस—कानून की खुली धज्जियां

सूत्रों का दावा है कि—
2023 में यह गेस्ट हाउस सराय एक्ट में रजिस्टर्ड नहीं था।
और 2025 की छापेमारी में भी यह पूरी तरह अवैध तरीके से चल रहा था।
मतलब साफ है—यह गेस्ट हाउस
अवैध भी था, अनैतिक भी, और बिना रजिस्ट्रेशन खुलेआम चल रहा था।
फिर कैसे चलता रहा? जवाब सिर्फ एक—
किसी ताकतवर का संरक्षण अवश्य मिला हुआ था।
🔴 2025 की छापेमारी—हर कमरे में चल रही थीं रंगरेलियां
14 नवंबर 2025 को फिर वही दृश्य सामने आया।
जैसे ही प्रशासन और पुलिस टीम गेस्ट हाउस में घुसी—हर कमरे में युवक-युवतियां आपत्तिजनक हालात में मिले।
तलाशी में
नशीली दवाएं,
गैरकानूनी आपत्तिजनक सामग्री,
और ऐसे सबूत मिले जो साफ बताते हैं कि यह गेस्ट हाउस सिर्फ नाम का गेस्ट हाउस नहीं बल्कि रैकेट का अड्डा बन चुका था।
🔴 गेस्ट हाउस संचालक का घमंड—नेताओं के नाम पर अकड़

छापेमारी के दौरान गेस्ट हाउस संचालक का रवैया और भी चौंकाने वाला था।
सूत्र बताते हैं कि वह कॉलर टाइट कर बाहर निकलकर कह रहा था—
“अभी विधायक-नेताओं का फोन आएगा… अधिकारी दुम दबाकर लौट जाएंगे… गेस्ट हाउस एक हफ्ते में फिर खुल जाएगा।”
क्या यह सिर्फ दबंगई थी या वास्तव में उसके पीछे किसी का हाथ?
यदि यह सत्य है तो यह लोकतंत्र पर सवाल है।
अगर झूठ है, तो यह जांच में सामने आना चाहिए कि संचालक का इतना हौसला आखिर आता कहां से है?
🔴 बुद्धभूमि कलंकित—क्या कार्रवाई सिर्फ दिखावा?

स्थानीय नागरिकों का आरोप बेहद गंभीर है।
वे कहते हैं—
“अगर प्रशासन सख्ती दिखाए तो कुशीनगर में ऐसा कोई अवैध काम नहीं रहेगा।
लेकिन सफेदपोशों, कुछ पुलिस कर्मियों और फर्जी पत्रकारों के संरक्षण के कारण यह कारोबार खत्म नहीं हो पा रहा।”
जहां बुद्ध की धरती दुनिया को शांति का संदेश देती है,
वहीं उसी धरती पर यह अनैतिक कारोबार वर्षों से फल-फूल रहा है—
यह अपने आप में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
🔴 इस बार चलेगा ‘भौकाल’ या ‘कानून’?
इतिहास गवाह है—
एनके गेस्ट हाउस हर बार छापा पड़ने के बाद कुछ समय के लिए बंद होता है और फिर किसी अदृश्य ताकत के संकेत पर दोबारा खुल जाता है।
अब पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—
इस बार क्या संचालक का ‘भौकाल’ चलेगा…
या प्रशासन का ‘कानून’?
अगर इस बार भी गेस्ट हाउस जल्द खुल गया,
तो यह साफ संदेश होगा कि
कुशीनगर में अवैधता पर प्रभावशाली लोग भारी हैं।
