
05 फरवरी | विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
सड़क हादसों में लगातार बढ़ती मौतों और लापरवाही की प्रवृत्ति पर लगाम कसने के लिए कुशीनगर प्रशासन अब आर-पार के मूड में दिख रहा है। मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन के पत्र संख्या–3032 दिनांक 31 दिसंबर 2025 के निर्देशों के क्रम में जनपद में बहुचर्चित “No Helmet, No Fuel” अभियान को सख़्ती के साथ लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। संदेश साफ़ है—कानून नहीं माना तो ईंधन भी नहीं मिलेगा।
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सड़क अनुशासन की असली परीक्षा होगा। प्रशासन का मानना है कि चेतावनी और अपील से आगे बढ़कर अब कठोर प्रवर्तन ही एकमात्र रास्ता बचा है। आए दिन हेल्मेट न पहनने, ओवरस्पीडिंग और शराब पीकर वाहन चलाने से हो रहे हादसे प्रशासन के लिए भी आईना बन चुके हैं।
अभियान के तहत जनपद के सभी पेट्रोल पंपों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि बिना हेल्मेट दोपहिया वाहन चालकों को पेट्रोल न दिया जाए। पेट्रोल पंपों पर बड़े-बड़े बैनर, पोस्टर और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि नियम तोड़ने की कोई गुंजाइश न बचे। कर्मचारियों को भी सख़्त निर्देश हैं कि वे नियमों के पालन में कोई ढिलाई न बरतें।
प्रशासन यहीं नहीं रुकेगा। पुलिस और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से ओवरस्पीडिंग, लेन उल्लंघन, गलत दिशा में वाहन चलाना, मोबाइल फोन का उपयोग, सीट बेल्ट व हेल्मेट न पहनने जैसे मामलों में सघन चेकिंग अभियान चलाएंगे। ज़रूरत पड़ने पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई होगी।
उल्लेखनीय है कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 129 के अनुसार दोपहिया वाहन पर सवार प्रत्येक व्यक्ति—यहां तक कि 4 वर्ष से अधिक आयु के बच्चे के लिए भी—मानक हेल्मेट पहनना अनिवार्य है। वहीं धारा 194D के तहत उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान पहले से मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति भी हेल्मेट अनुपालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे चुकी है, लेकिन सवाल यह है कि जब तक जेब पर चोट न पड़े, क्या लापरवाही रुकेगी?
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह अभियान जनता को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि जान बचाने के लिए है। उन्होंने आमजन से अपील की है कि नियमों का पालन करें, क्योंकि प्रशासन की सख़्ती असल में नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी है।
अब देखना यह होगा कि कुशीनगर की सड़कों पर चलने वाले वाहन चालक इस सख़्त संदेश को कितनी गंभीरता से लेते हैं—क्योंकि इस बार चेतावनी नहीं, कार्रवाई तय

