
नकल माफियाओं और विभागीय साठगाठ की तैयारी, सीएम योगी के नकलविहीन परीक्षा संकल्प पर पानी फेरने की साजिश तेज, सिस्टम की पोल खुली।
कुशीनगर में परीक्षा केंद्र घोटाले का बड़ा धमाका!गाइडलाइन हवा में, मानकों की उड़ाई धज्जियाँ—करोड़ों का ‘सेंटर गेम’ बेनकाब!
कुशीनगर। सूबे में नकलविहीन व पारदर्शी परीक्षा कराने का योगी सरकार का संकल्प एक बार फिर कुशीनगर में सवालों के घेरे में है। शासन के स्पष्ट गाइडलाइन, कड़े निर्देश और निर्धारित मानकों को विभागीय अधिकारियों ने इस तरह दरकिनार किया है कि देखने वाले भी दंग रह जाएं। परीक्षा केंद्र आवंटन में जिस तरह की मनमानी, मिलीभगत और खुलेआम सौदेबाजी सामने आ रही है, उसने जिले की परीक्षा व्यवस्था की रीढ़ ही तोड़कर रख दी है।
सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं में खुलकर सामने आया है कि 1.5 से 2 लाख रुपये की मोटी रकम लेकर कई विद्यालयों को ‘मानक’ के नाम पर सजाकर–संवारकर बोर्ड को रिपोर्ट भेजी गई, जबकि हकीकत में उन संस्थानों में न तो बुनियादी कमरे हैं और न ही सुरक्षा व्यवस्था। लेकिन जब विभाग का ‘शहंशाह’ और नकल माफियाओं की सांठगांठ एक हो जाए, तब सच को झूठ और झूठ को सोना बनाने में कितना समय लगता है—यह इस बार कुशीनगर बखूबी दिखा रहा है।
नेशनल पब्लिक स्कूल: 13 कमरों वाला स्कूल, रिपोर्ट में बना दिया 25 कमरों वाला मॉडल सेंटर!
सबसे बड़ा उदाहरण हाटा तहसील के तुर्कडिहा स्थित नेशनल पब्लिक स्कूल का है। विद्यालय में 13 कमरे हैं, बाउंड्रीवाल भी अधूरी है, लेकिन डीआईओएस कार्यालय में इसकी रिपोर्ट ‘मानकों के अनुरूप’ बताकर बोर्ड को भेज दी गई। अब यह स्कूल परीक्षा केंद्र भी बन गया।
यह वही विद्यालय है, जिसके नाम पर हर साल लाखों रुपये की ‘डीलिंग’ होने की चर्चा वर्षों से चलती रही है, और इस बार भी वही खेल दोहराया गया—बस और बड़े पैमाने पर।
लक्ष्मी सिंह इंटर कॉलेज: 13 कमरों को रिपोर्ट में 29 कमरों का जादुई रूप!
हाटा तहसील क्षेत्र का ही एक और मामला और भी शर्मनाक है।
लक्ष्मी सिंह इंटरमीडिएट कॉलेज, तुर्कडिहा में केवल 13 कमरे हैं, लेकिन डीआईओएस कार्यालय ने 29 कमरों का चमत्कारी आंकड़ा बोर्ड को भेज दिया।
कक्ष संख्या बढ़ी कैसे?
भवन बदला या विभाग का स्प्रेडशीट?
इसका जवाब विभाग में किसी के पास नहीं। सवाल पूछने पर वही पुराना रटा-रटाया जवाब—”हम जांच करा रहे हैं।”
इंडियन पब्लिक इंटर कॉलेज: न कमरे, न बाउंड्रीवाल—फिर भी परीक्षा केंद्र!
तितला स्थित इंडियन पब्लिक इंटर कालेज तो इस खेल का सबसे बोल्ड उदाहरण बताया जा रहा है।
न पर्याप्त कमरे
न प्रयोगशाला
न बाउंड्रीवाल
न CCTV
न सुरक्षा का मानक
फिर भी डीआईओएस कार्यालय ने ‘मानक के अनुरूप’ बताते हुए इसे बोर्ड परीक्षा केंद्र बनवा दिया।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस खेल का ‘रेट’ पहले 1 लाख था, इस बार 1.5–2 लाख तक पहुंच गया है।
कप्तानगंज क्षेत्र: आठ वित्तविहीन विद्यालयों को सेंटर, जबकि मानक कहीं पास नहीं!
कप्तानगंज तहसील क्षेत्र में उर्मिला देवी इंटर कॉलेज सहित आठ ऐसे वित्तविहीन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया, जिन्हें बोर्ड मानकों के अनुसार किसी भी स्थिति में केंद्र नहीं बनाया जा सकता।
हालांकि उर्मिला देवी इंटर कॉलेज के प्रबंधक का दावा है कि “हमारा स्कूल सभी मानकों को पूरा करता है,” पर स्थानीय शिक्षक और पूर्व निरीक्षण रिपोर्टें कुछ और ही कहानी कहती हैं।
परीक्षार्थी कम, केंद्र अधिक – आखिर क्यों?
सबसे हैरानी वाली बात यह है कि इस वर्ष जनपद में पिछले साल की तुलना में लगभग 9,000 परीक्षार्थी कम हैं।
पिछले वर्ष 152 परीक्षा केंद्र बने थे।
लॉजिकल रूप से इस बार कम से कम 18 परीक्षा केंद्र कम होने चाहिए।
लेकिन विभागीय ‘कारिंदों’ की डीलिंग और ‘नेटवर्क गेम’ के सामने लॉजिक दम तोड़ देता है।
कौन-सा स्कूल बनेगा सेंटर और कौन-सा नहीं—यह अब मेरिट या मानक नहीं, बल्कि ‘रेट कार्ड’ तय कर रहा है।
सालों से ईमानदारी से परीक्षा करा रहे विद्यालयों को बाहर!
सबसे बड़ा आक्रोश उन विद्यालयों में है, जो दो दशकों से लगातार पारदर्शी और नकलविहीन परीक्षा केंद्र चलाते रहे हैं।
इनमें
जानकी देवी इंटर कॉलेज, प्रसिद्ध मठिया
चंद्रावती देवी इंटर कॉलेज, पकड़ी बांगर
और लगभग आधा दर्जन पुरानी संस्थाएं
शामिल हैं, जिन्हें इस बार केंद्र सूची से बाहर कर दिया गया है।
ये संस्थान बोर्ड के हर मानक पर फिट बैठते हैं, लेकिन नई ‘डीलिंग सूची’ में इनका नाम नहीं चढ़ पाया, और इन्हें बाहर कर दिया गया।
🔴 मानक क्या कहते हैं और विभाग क्या कर रहा है?
बोर्ड के अनुसार केंद्र बनाने के प्रमुख मानक:
CCTV अनिवार्य
1000 क्षमता वाले विद्यालय को 30 अंक
750 क्षमता वाले विद्यालय को 20 अंक
500 क्षमता वाले विद्यालय को 10 अंक
प्रयोगशाला क्रियाशील होना चाहिए
91 बिंदुओं वाला आवेदन ऑनलाइन अपलोड
भवन, कक्ष संख्या, सुरक्षा, बाउंड्रीवाल, फर्नीचर सभी अनिवार्य
जिन्हें केंद्र नहीं बनाया जा सकता:
गली/सड़क में खुलने वाले कक्ष
प्रबंधकीय विवाद वाले संस्थान
125 से कम छात्र संख्या वाले वित्तविहीन स्कूल
पिछले 3 वर्ष में गड़बड़ी वाले विद्यालय
बिना बाउंड्रीवाल या बिना प्रयोगशाला वाले स्कूल
लेकिन कुशीनगर में
“मानक नहीं, मनमानी चलेगी”
यह नई परंपरा बनती जा रही है।
🔴 डीआईओएस कार्यालय में ‘सिस्टम’ नहीं, ‘सिंडिकेट’ काम कर रहा है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि परीक्षा केंद्र आवंटन को लेकर डीआईओएस कार्यालय में एक तरह का सिंडिकेट सक्रिय है—
जहाँ शिक्षक, शिक्षा माफिया, प्रबंधक और बाहरी दलाल मिलकर हर साल लाखों का ‘सेंटर गेम’ खेलते हैं।
बोर्ड रिपोर्ट में कमरे बढ़ जाते हैं,
बाउंड्रीवाल खड़ी दिखा दी जाती है,
CCTV ‘कार्यशील’ दिखा दिया जाता है,
और जो पूरी तरह फेल स्कूल होता है, उसे भी ‘उत्कृष्ट’ लिखकर भेज दिया जाता है।
इस पूरे खेल में सबसे बड़ा नुकसान होता है—
ईमानदार विद्यालयों, लाखों परीक्षार्थियों और पूरी परीक्षा प्रणाली का।
🔴 योगी सरकार की सख्त मंशा और कुशीनगर का ‘नकल तंत्र’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार नकल रोकने, पारदर्शी परीक्षा कराने और शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं।
लेकिन कुशीनगर में जैसे विभागीय अधिकारी और नकल माफिया एकजुट होकर सरकारी मंशा को धता बताने की तैयारी में जुटे हैं।
केंद्र आवंटन में हो रही धांधली, फर्जी रिपोर्टिंग, बिना मानक के सेंटर, और ईमानदार विद्यालयों को बाहर करना—ये सब मिलकर साफ संकेत दे रहे हैं कि जिला-level पर “नकल मुक्त परीक्षा” की लड़ाई को अंदर से ही पलीता लगाने की कोशिश चल रही है।
🔴 अब देखना होगा—जांच होती है या सेंटर गेम इसी तरह चलता रहेगा?
जनपद में परीक्षा केंद्र का यह मामला अब गर्मा चुका है।
शिक्षक संगठन आवाज उठा रहे हैं, अभिभावक चिंतित हैं, और कई विद्यालय खुलकर आरोप लगा रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है—
क्या शासन इस मामले में हस्तक्षेप करेगा?
क्या फर्जी रिपोर्ट देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
क्या नकल माफिया के सिंडिकेट पर सर्जिकल स्ट्राइक होगी?
या फिर
परीक्षा केंद्र ‘सौदेबाजी’ का यह खेल
इस बार भी हर साल की तरह
सिर्फ चर्चा बनकर रह जाएगा?
