
कुशीनगर। बहादुरपुर चौकी क्षेत्र में हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने सिर्फ दो जिंदगियां नहीं लीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, ओवरलोडिंग रैकेट और अवैध माल परिवहन के पूरे तंत्र की पोल खोल दी है। यह हादसा दर्शाता है कि जब इंश्योरेंस, टैक्स और वैध कागज़ात फेल हों, तब मुआवज़ा, सुरक्षा और जवाबदेही की कीमत कौन चुकाएगा। पीड़ित परिवार आंसुओं में डूबा है, ग्रामीणों में गुस्सा है, लेकिन सिस्टम चुप्प है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बस का इंश्योरेंस फेल था, उसका टैक्स जमा नहीं था और वाहन वैध नहीं था, तब हादसे में मरे लोगों के परिवार को मुआवज़ा कैसे मिलेगा। मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 146 और 196 के तहत इंश्योरेंस अनिवार्य है। बिना बीमा के वाहन सड़क पर चल ही नहीं सकता, और दुर्घटना की स्थिति में क्लेम असंभव हो जाता है। बावजूद इसके, ऐसे वाहन सड़क पर खुलेआम दौड़ रहे हैं।
पीड़ित परिवारों की पीड़ा हृदय विदारक है। एक मृतक की मां कहती हैं, “हमारे बेटे की जान चली गई, पर इंसाफ कौन दिलाएगा? घर कैसे चलेगा?” वहीं मृतक बहन फफकते हुए कहती हैं, “हादसा नहीं हुआ, हमें लूटा गया। हमारी जिंदगी लूटी गई।” यही प्रश्न जिले और प्रशासन के सामने खड़ा है—क्या जिनकी लापरवाही से मौत हुई, उन्हीं से सिस्टम इंसाफ दिलाएगा?
यह बस सिर्फ यात्री वाहन नहीं थी। इसमें भारी भरकम परचून का सामान था, जिसे अवैध तरीके से ट्रांसपोर्ट किया जा रहा था। GST कानून के अनुसार E-Way Bill अनिवार्य है, लेकिन बहादुरपुर चौकी पर जब जप्त माल आया, उस पर सवाल उठे कि क्या E-Way Bill था? क्या GST विभाग को सूचना दी गई? या फिर मैनेजमेंट के तहत सब अनदेखा कर दिया गया? यदि नहीं, तो यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि अवैध वसूली और GST चोरी का सिस्टमेटिक नेटवर्क है।
तीन दिन पहले इसी चौकी पर पकड़े गए अवैध सामान को किस प्रक्रिया में छोड़ा गया, इसका रिकॉर्ड कहां है? कौन अधिकारी जांच के लिए जिम्मेदार था? कप्तान साहब इस मामले की CCTv फुटेज देख सकते हैं, जिसमें साफ दिखेगा कि जांच के बाद भी कैसे बिना कागज़ के माल छोड़ा गया।
सवाल ये भी है कि अगर ARTO और MVI दिनभर सड़क पर वाहन चेक करते हैं, तो फिर ऐसे वाहनों को सड़क पर कैसे दौड़ने दिया जा रहा है? ओवरलोड बसें टोल कटाकर फर्राटा भर रही हैं, जबकि कानून स्पष्ट है—धारा 129 और 194 के तहत ओवरलोड वाहन सीज़ किया जा सकता है। बहादुरपुर टोल और चौकी पर पकड़े गए वाहनों से सिर्फ जुर्माना वसूला गया और बसें छोड़ दी गईं।
अगली घटना ने सिस्टम की विफलता को और उजागर किया। एक ओवरलोड बस टोल काटकर भाग रही थी, जिसे टोल मैनेजर की सूचना पर बहादुरपुर पुलिस ने सड़क जाम कर पकड़ा। बस से ओवरलोड का पेनल्टी वसूला गया, लेकिन वाहन को आगे बढ़ने दिया गया। सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई कानून के मुताबिक हुई या सिर्फ जुर्माना लेकर बस को मौत ढोने के लिए छोड़ दिया गया।
अब प्रशासन के सामने जवाबदेही तय करनी होगी। परिवहन विभाग और RTO पर कार्रवाई होनी चाहिए। बहादुरपुर चौकी और टोल वाले केस की CCTv जांच होनी चाहिए। पीड़ित परिवारों के मुआवज़े की वैधानिक गारंटी सुनिश्चित होनी चाहिए। अवैध सामान और GST रैकेट की जांच के लिए विशेष टीम बनाई जानी चाहिए।
MV Act और GST कानून स्पष्ट करते हैं कि बिना बीमा और टैक्स के वाहन सड़क पर नहीं चल सकता। धारा 146/196 के तहत क्लेम के लिए इंश्योरेंस अनिवार्य है। GST और E-Way Bill के बिना माल परिवहन अवैध है। ओवरलोडिंग पर धारा 129/194 के तहत दंडित किया जा सकता है। फिर भी ऐसी बसें सड़क पर दौड़ रही हैं, और सिस्टम आंख मूंदकर बैठा है।
पीड़ित परिवारों की हालत देखते ही बनती है। एक मां कहती हैं, “हमारे बेटे की मौत के बाद घर की रोटी कैसे चलेगी? कोई हमें जवाब देगा या हम चुप रहेंगे?” मृतक की बहन फफकते हुए कहती हैं, “किसकी गलती से गया हमारा भाई? कौन जिम्मेदार है?” यही सवाल पूरे प्रशासनिक तंत्र पर उठता है।
बहादुरपुर चौकी और टोल वाले मामलों ने स्पष्ट कर दिया कि ओवरलोडिंग–RTO–पुलिस–ट्रांसपोर्ट नेक्सस कितनी घातक है। अगर जिम्मेदार अधिकारियों ने कड़े कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में ऐसी दुर्घटनाएं अनवरत होती रहेंगी। प्रशासन को अब सीधे जवाब देना होगा, न कि जुर्माने और अनदेखी के बहाने मामले टालने होंगे।
अंत में, यह सिर्फ खबर नहीं है। यह दस्तावेज़ है, यह सवाल है, यह जनता की आवाज़ है। जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, जब तक पीड़ित परिवार को मुआवज़ा नहीं मिलता, और जब तक सिस्टम जवाब नहीं देता—बहादुरपुर की सड़क सिर्फ खामोश नहीं रहेगी। यह सवाल हर रोज गूंजेगा: “जिम्मेदार कौन?”
कुशीनगर में बहादुरपुर चौकी का यह हादसा और उसके बाद की घटनाएं स्पष्ट कर देती हैं कि प्रशासनिक जवाबदेही, कानूनी कार्रवाई और मुआवज़े की गारंटी के बिना सिस्टम में सुधार नामुमकिन है। पीड़ितों की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। इंश्योरेंस, टैक्स, ओवरलोडिंग और GST जैसे कानूनी मुद्दों पर कड़ी निगरानी आवश्यक है। RTO, परिवहन विभाग और पुलिस को जवाबदेह ठहराना ही भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने का एकमात्र रास्ता है।
हर मौत सवाल है। हर सवाल दस्तावेज़ है। बहादुरपुर चौकी में हुई यह दुर्घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासन और सिस्टम की विफलता का काला चेहरा है। जनता अब जवाब मांग रही है—मुआवज़ा कौन देगा? जिम्मेदार कौन है? और अगली मौत कब तक टली रहेगी?
यह रिपोर्ट प्रशासन को सीधा कटघरे में खड़ा करती है, कानूनी धाराओं के साथ हर सवाल का वजन रखती है, और भावनात्मक रूप से पीड़ित परिवार की आवाज़ को सामने लाती है। बहादुरपुर चौकी, कुशीनगर—यह सिर्फ लोकेशन नहीं, यह सिस्टम की परीक्षा का मैदान है।
