
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी राष्ट्रनिर्माण के सच्चे शिल्पी और अद्वितीय विचारक रहे। उन्होंने व्यक्तिगत जीवन और राजनीति दोनों में सिद्धांत व व्यवहार की एकरूपता का परिचय दिया। तमाम विरोधों के बावजूद उनका ध्येय सदैव राष्ट्रभक्ति रहा। दीनदयाल जी युगद्रष्टा थे, जिन्होंने वैचारिक स्तर पर देश को एक नई दिशा प्रदान की। उनका चिंतन सत्ता प्राप्ति का साधन नहीं बल्कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण और भारत के प्राचीन गौरव को पुनर्स्थापित करने का संकल्प था। उनके द्वारा बोए गए विचारों और सिद्धांतों के बीज आज भी भारतीय समाज को एक वैकल्पिक और सकारात्मक विचारधारा से प्रेरित करते हैं।
मऊ। भारतीय जनता पार्टी मऊ जनपद कार्यालय रविन्द्र नगर में गुरुवार को सेवा पखवाड़ा के अंतर्गत पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व जिलाध्यक्ष प्रवीण गुप्ता ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि जब तक समाज के गरीब-से-गरीब व्यक्ति तक विकास नहीं पहुंचता, तब तक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने अपने तपस्यापूर्ण जीवन और विचारों से न जाने कितने राष्ट्रभक्तों को प्रेरित किया, जिन्होंने देश सेवा के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया।
अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष दुर्गेश राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते पांच वर्षों से सरकार ने गरीब-कल्याण की योजनाओं के माध्यम से उपाध्याय जी के एकात्म मानववाद और अंत्योदय की विचारधारा को साकार किया है। पूर्व जिलाध्यक्ष लल्लन मिश्र ने उन्हें भारतीय राजनीति का गंभीर दार्शनिक, चिंतक और संगठनकर्ता बताते हुए कहा कि उन्होंने सार्वजनिक जीवन में शुचिता और गरिमा के उच्च आयाम स्थापित किए।
पूर्व विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि उपाध्याय जी भाजपा के वैचारिक मार्गदर्शक और नैतिक प्रेरणा-स्रोत रहे हैं। संगोष्ठी को पूर्व विधायक पवन केडिया, जटाशंकर त्रिपाठी, विनय जायसवाल, राकेश जायसवाल और फूलबदन कुशवाहा ने भी संबोधित किया। संचालन जिला मंत्री विवेकानंद शुक्ल ने किया। मौके पर पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
