
दुदही ब्लॉक, कुशीनगर।
सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं—चाहे नरेगा हो, राज्य वित्त, केंद्रीय वित्त, या पन्द्रहवां वित्त आयोग—का उद्देश्य ग्रामीणों के लिए विकास का मजबूत आधार तैयार करना है। शासनादेश स्पष्ट है—हर ग्राम पंचायत, हर अधिकारी और हर प्रधान को पारदर्शिता, इमानदारी और गुणवत्ता के साथ कार्य करना होगा। लेकिन दुदही विकास खण्ड क्षेत्र में ऐसा लगता है मानो विकास कार्यों को ‘पारदर्शिता’ और ‘गुणवत्ता’ शब्दों से कोई लेना–देना ही नहीं रहा।
स्थिति इतनी भयावह है कि ग्राम पंचायत धर्मपुर पबऱ्त (धर्मपुर खुर्द) की जमीनी हकीकत देखकर ग्रामीण दंग रह गए हैं।
लाखों का मनरेगा पार्क बना खंडहर—बाउंड्री वॉल ध्वस्त, उपकरण गायब, और अधिकारी मौन!
विगत वर्षों—2021 से 2025 तक—लाखों रुपए की लागत से माता भगवती डमूर स्थान से दक्षिण दिशा की ओर स्थित पीच सड़क के पास एक पक्का मनरेगा पार्क और खेल मैदान का निर्माण कराया गया था।
इस पार्क को ग्राम पंचायत का गौरव बनने की बजाय, अधिकारी–प्रधान गठजोड़ की लापरवाही और भ्रष्टाचार का जीता–जागता प्रमाण बना दिया गया है।
खेल मैदान की पक्की बाउंड्री वॉल पूर्वी दिशा में पूरी तरह टूटकर ढह चुकी है।
पार्क के अंदर लगाए गए खेल उपकरण या तो गायब हैं या टूटकर कचरे का ढेर बन चुके हैं।
लाखों रुपए खर्च कर बनाया गया पार्क, कुछ ही वर्षों में कबाड़ में कैसे बदल गया—यह अपने आप में सबसे बड़ा सवाल है।
ग्रामीणों का आरोप—घटिया मटेरियल, कमीशनखोरी और खुलेआम धन लूट का खेल
ग्रामीणों ने साफ कहा है—
“लाखों खर्च हुए, लेकिन गुणवत्ता की जगह भ्रष्टाचार का खेल चलाया गया।”
उनका आरोप है कि—
ईंटें घटिया थीं
सीमेंट मानक से कम
बालू और गिट्टी बेहद निम्न स्तर की
मोरंग की जगह सफेद बालू या मिट्टी भर दी गई
नींव की खुदाई पूरा न करके कागजों में बढ़ा–चढ़ाकर दिखा दी गई
यह सब सुनकर समझना मुश्किल नहीं कि कार्य स्थल पर किस स्तर का भ्रष्टाचार हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान और सचिव ने मिलकर योजनाओं में धन की बंदरबांट की है।
बाउंड्री वॉल क्यों टूटी? किसका राज़ छिपा है?—ग्राम पंचायत में उठ रहे बड़े सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि लाखों रुपए से बनी पक्की बाउंड्री वॉल चार साल में ही कैसे ढह गई?
क्या इसकी नींव कमजोर थी?
क्या मटेरियल मानक के अनुरूप नहीं था?
क्या निर्माण कार्य में सरकारी धन की खुली लूट हुई?
ग्रामीणों के अनुसार—
“यह कोई प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की दीवार गिरने का परिणाम है।”
ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार की गंगा—ऊपर तक पहुँच चुकी है?
ग्रामीणों का आरोप है कि यह सिर्फ एक पार्क नहीं, बल्कि पूरा विकास तंत्र भ्रष्टाचार के दलदल में फंस चुका है।
हर वर्ष ग्राम पंचायत में विकास कार्यों का ढिंढोरा पीटा जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत है।
ग्राम पंचायत सचिव, प्रधान प्रतिनिधि और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से—
निर्माण कार्यों में भारी अनियमितता
मटेरियल में भारी कटौती
सफेद बालू की मिलावट
कागजों में बढ़ा–चढ़ाकर दिखाया गया खर्च
और नरेगा के नाम पर धन की व्यापक बंदरबांट हुई है
यह सब देखकर ग्रामीणों में गुस्सा चरम पर है।
सरकारी दावों की पोल—युवा खिलाड़ियों के सपने हुए ध्वस्त
सरकार दावा करती है कि गांवों में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए खेल मैदान तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन धर्मपुर पबऱ्त ग्राम का हाल इसके बिल्कुल उलट है।
खेल मैदान—
बिना बुनियादी सुविधा
बिना उपकरण
बिना सुरक्षित बाउंड्री
और बिना किसी रखरखाव
आज खंडहर बन चुका है। खिलाड़ी कहाँ अभ्यास करेंगे? किस मैदान में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे?
यह मैदान देखकर यह कहना मुश्किल है कि यह खेल का मैदान है या टूटा हुआ निर्माण स्थल।
अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद—शिकायतें फाइलों में दब गईं
ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति होती रही।
किसी भी स्तर पर न निरीक्षण हुआ, न माप–तौल, न गुणवत्ता जांच।
अधिकारियों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है—
क्या भ्रष्टाचार की गंगा नीचे तक ही सीमित है या ऊपर तक बह रही है?
सख्त तकनीकी जांच और भौतिक सत्यापन की मांग
ग्रामीणों की मांग है कि—
नरेगा
राज्य वित्त
केंद्रीय वित्त
ग्राम निधि
और अन्य योजनाओं से मिली राशि की पूरी जांच हो।
मौके पर भौतिक सत्यापन,
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच,
खर्च के अभिलेखों का ऑडिट,
और जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है।
धर्मपुर पबऱ्त ग्राम पंचायत में हुआ यह मामला सिर्फ एक पार्क के ढहने का नहीं है।
यह सरकारी योजनाओं की दुर्दशा, भ्रष्टाचार के बढ़ते दबदबे और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की विफलता की तस्वीर है।
सरकार लाखों–करोड़ों रुपए ग्रामीण विकास पर खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार के कारण यह धन मकानों की दीवारों में नहीं, भ्रष्टाचार की जेबों में गिर रहा है।
ग्रामीणों की नाराज़गी और टूटा हुआ खेल मैदान—दोनों साफ–साफ बताते हैं कि
धर्मपुर पबऱ्त में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल अब शासन-प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं।
