
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
दुदही/उचकी पट्टी —
कुशीनगर जनपद के विकास खण्ड दुदही की ग्राम सभा उचकी पट्टी के एक गरीब परिवार की बदहाली स्थानीय व्यवस्था की पोल खोल रही है। पांच साल बीत जाने के बाद भी यह परिवार आज तक प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित है। अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार का खेल इतना गहरा है कि परिवार के नाम सर्वे तक नहीं हुआ।
परिवार के घर के पीछे एक जर्जर झोपड़ी खड़ी है, जिसकी हालत देखकर किसी का भी दिल पसीज जाए। बारिश के दिनों में पानी रिसता है, गर्मी में टीन और पुआल की छत आग बनकर सिर पर तपती है, और ठंड में तेज हवाएं दीवारों को मानो उड़ा ले जाने को तैयार रहती हैं। बावजूद इसके, गांव में घूम-घूमकर योजनाओं का बड़ा-बड़ा बखान करने वाले अधिकारी इस परिवार को देखने तक नहीं पहुंचे।
गांव वालों का कहना है कि कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार या तो सर्वे का बहाना बना या फाइल आगे बढ़ने के नाम पर “सब ठीक हो जाएगा” कहकर मामला टाल दिया गया। सवाल यह है कि आखिर कब तक गरीब परिवार यूं ही झोपड़ी में जिंदगी गुजारने को मजबूर रहेगा?
इतना ही नहीं, ग्राम सभा में शुद्ध पेयजल की सुविधा भी बुरी तरह चरमराई हुई है। नल खराब पड़े हैं, पाइपलाइन जगह-जगह टूटी है, और जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचने की बजाय दूर से ही रिपोर्ट पूरी मान लेते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि योजनाओं में आने वाला पैसा ऊपर ही ऊपर पच जाता है, नीचे गरीब तक सिर्फ वादे और भरोसे पहुंचते हैं।
उचकी पट्टी की यह तस्वीर न सिर्फ विकास की असलियत उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि योजनाएं तभी सफल होती हैं जब अधिकारी और जनप्रतिनिधि ईमानदारी से काम करें। फिलहाल गांव के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन जागेगा और इस परिवार को उसका हक—एक सुरक्षित आवास और शुद्ध जल—जल्द मिलेगा।
