
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर।
कुशीनगर जनपद के पडरौना थाना क्षेत्र में कोतवाल हर्षवर्धन सिंह के खिलाफ आक्रोश की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। छोटेलाल कुशवाहा की हत्या के बाद पुलिस की कथित सुस्त कार्यवाही और निष्क्रियता को लेकर सैकड़ों की संख्या में लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। आम जनमानस से लेकर जनप्रतिनिधि तक—सबकी आवाज़ एक सुर में उठ रही है कि “जिम्मेदार हटाओ, न्याय दिलाओ!”
जानकारी के अनुसार क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर असर डालने वाले गंभीर अपराध के बाद भी तेज़ और ठोस कार्रवाई न होने से स्थानीयों में नाराज़गी दिनों-दिन बढ़ती गई। हालात इतने विस्फोटक हुए कि कुशीनगर के सांसद विजय कुमार दुबे तक को जन आक्रोश के स्वर सीधे पुलिस अधीक्षक कुशीनगर तक पहुँचाने पड़े। सांसद ने स्वयं जनता की पीड़ा को गंभीरता से लिया और SP कुशीनगर को पूरे मामले से अवगत कराया, जिसके बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज होने लगी है।
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि थाना अध्यक्ष की कार्यशैली ढीली, पक्षपातपूर्ण और जनविश्वास के विपरीत है। लोगों का कहना है कि हत्या जैसे गंभीर मामले में भी अगर पुलिस सक्रियता न दिखाए, अपराधियों में भय न जगाए और न्याय की उम्मीद धुंधली हो जाए, तो फिर जनता चुप क्यों बैठे? इसी को लेकर बड़ी-बड़ी टोलियाँ थाना परिसर से लेकर जिले के प्रशासनिक दफ्तरों तक पहुँचीं, और आवाज़ बुलंद की—
“कोतवाल हटाओ—न्याय दिलाओ!”
स्थानीय लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक सख्त कार्रवाई नहीं होती और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। जिले की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक एक ही सवाल गूंज रहा है—
“आखिर कब तक ढीली पड़ेगी पुलिस की पकड़?”
अब निगाहें टिकी हैं प्रशासनिक कार्रवाई पर—क्या जनता की आवाज़ भविष्य में पुलिस की कार्यप्रणाली को जागृत करेगी या आक्रोश और भड़केगा?
