
खुलासे के बाद शिकायतकर्ता को हटाए जाने पर उठे प्रश्न
कुशीनगर। जिले में चल रही बोर्ड परीक्षाओं के बीच निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप हैं कि कुछ परीक्षा केन्द्रों पर नियमों की अनदेखी कर सुनियोजित ढंग से नकल कराई जा रही है। चर्चा है कि जहाँ सीसीटीवी निगरानी या वाइस रिकॉर्डिंग की व्यवस्था प्रभावी नहीं है, वहाँ कथित रूप से इमला बोलकर प्रश्नपत्र हल कराए जा रहे हैं। इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा व्यवस्था की साख और परीक्षा की विश्वसनीयता को कटघरे में ला खड़ा किया है।
सूत्रों के अनुसार, जिन छात्रों द्वारा कथित रूप से अवैध मांगों को पूरा नहीं किया गया, उन्हें सीटिंग प्लान के माध्यम से अलग तरीके से बैठाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। कहा जा रहा है कि मिश्रित सीटिंग व्यवस्था के बजाय कुछ विद्यालयों में अपने छात्रों को अलग कमरों में समूहबद्ध कर दिया गया, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
इस मामले में महर्षि वाल्मीकि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पिपरैचा (हाटा) केन्द्र का नाम प्रमुखता से चर्चा में है। यहाँ के वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक विजय यादव और स्टेटिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को संयुक्त पत्र देकर अनियमितताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
संयुक्त शिकायत में क्या कहा गया?
डीआईओएस को भेजे गए पत्र में उल्लेख है कि परीक्षा केन्द्र पर बाहरी एवं आंतरिक परीक्षार्थियों को मिलाकर बैठाने के अनिवार्य नियम का पालन नहीं किया गया। आरोप के अनुसार, विद्यालय ने अपने छात्रों को अलग-अलग कमरों में बैठाया, जिससे उन्हें कथित रूप से अनुचित लाभ मिल सके। शिकायत में यह भी कहा गया कि इस ‘अलगाव’ का फायदा उठाकर छात्रों को बोल-बोलकर उत्तर लिखवाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पत्र में स्पष्ट किया गया कि बोर्ड परीक्षा के दिशा-निर्देशों के अनुसार “मिश्रित सीटिंग व्यवस्था” का पालन अनिवार्य है, ताकि किसी एक विद्यालय के छात्रों को समूह में बैठाकर लाभ न दिया जा सके। यदि यह व्यवस्था भंग होती है, तो परीक्षा की निष्पक्षता पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
वाइस रिकॉर्डिंग पर भी उठे सवाल
शिकायत में यह आरोप भी दर्ज है कि कई कक्षों में वाइस रिकॉर्डिंग की व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। यदि यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह केवल तकनीकी कमी नहीं बल्कि परीक्षा सुरक्षा प्रोटोकॉल की गंभीर चूक मानी जाएगी। ऐसी स्थिति में इमला बोलकर नकल कराए जाने की आशंका और प्रबल हो जाती है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीसीटीवी और वाइस रिकॉर्डिंग जैसी व्यवस्थाएँ नकल रोकने के लिए महत्वपूर्ण उपकरण हैं। इनकी अनुपस्थिति या निष्क्रियता परीक्षा की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकती है।
कार्रवाई पर उठे सवाल
सबसे अधिक चर्चा का विषय यह रहा कि शिकायत सामने आने के बाद कथित अनियमितताओं पर त्वरित कठोर कार्रवाई के बजाय शिकायत करने वाले वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक को ही केन्द्र से हटा दिया गया। इस निर्णय ने शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
हालाँकि, डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्त ने इस विषय पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि शिकायत की जांच कराई गई है तथा केन्द्र व्यवस्थापक को नोटिस जारी किया गया है। उनके अनुसार, वाह्य केन्द्र व्यवस्थापक की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें उपचार हेतु लखनऊ जाना था, इसलिए उनके स्थान पर दूसरे अधिकारी की तैनाती की गई।
इसके बावजूद, यह प्रश्न बना हुआ है कि यदि केन्द्र पर वाइस रिकॉर्डिंग या मिश्रित सीटिंग व्यवस्था में कमी पाई जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
सूत्रों की मानें तो…
गोपनीय सूत्रों का दावा है कि कुछ परीक्षा केन्द्रों पर कैमरा और वाइस रिकॉर्डिंग व्यवस्था को जानबूझकर प्रभावित किया जा रहा है, ताकि निगरानी कमजोर पड़े और सीटिंग प्लान में मनमानी की जा सके। आरोप है कि जहाँ कैमरे बंद या निगरानी ढीली होती है, वहीं कथित रूप से इमला बोलकर उत्तर लिखवाने जैसी गतिविधियाँ सामने आती हैं।
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह परीक्षा नियमावली का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
अभिभावकों और मेधावी छात्रों में रोष
इस पूरे घटनाक्रम से अभिभावकों और मेहनती छात्रों में असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि बोर्ड परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में यदि पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित नहीं होंगे, तो ईमानदार प्रयासों का महत्व कम हो जाएगा।
मेधावी छात्रों का कहना है कि नकल जैसी प्रवृत्तियाँ मेहनत और प्रतिभा के मूल्य को ठेस पहुँचाती हैं। अभिभावकों ने मांग की है कि परीक्षा केन्द्रों की निगरानी व्यवस्था को और सख्त किया जाए तथा किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित हो।
बड़ी तस्वीर: दावे बनाम ज़मीनी हकीकत
गौरतलब है कि 18 फरवरी से जिले के 194 परीक्षा केन्द्रों पर माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाएँ संचालित हो रही हैं। वर्ष 2026 में कुल 1,08,159 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं, जिनमें हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के हजारों छात्र शामिल हैं।
ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी निगरानी, मिश्रित सीटिंग व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता ही परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने की कुंजी हैं।
निष्कर्षतः, कुशीनगर में उठे ये आरोप केवल एक केन्द्र तक सीमित नहीं माने जा रहे, बल्कि यह परीक्षा प्रणाली की मजबूती, निगरानी तंत्र और जवाबदेही पर व्यापक बहस को जन्म दे रहे हैं। अब सभी की निगाहें जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं — ताकि शिक्षा व्यवस्था की साख और छात्रों का भरोसा कायम रह सके।
