
कुशीनगर। तहसील तमकुहीराज के ग्राम सभा कुबेरा भुआल पट्टी में राजस्व अभिलेखों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम निवासी व शिकायतकर्ता धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि ग्राम समाज की भूमि, जो गाटा संख्या 32/ व/गाटा संख्या/34/ जो राजस्व अभिलेखों में “नवीन परती” के नाम से अभिलेखों में दर्ज है, उसमें मनमाने ढंग से पट्टा धारकों के मौखिक रूप से संबंधित लेखपाल द्बारा नाम बताकर व चढ़ाकर अभिलेखों में हेराफेरी की गई है। शिकायतकर्ता धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय का कहना है। कि पट्टा किसे, कब और किन नियमों के तहत दिया गया, इसकी जानकारी आज तक पारदर्शीता रूप में उपलब्ध नहीं कराई गई।जबकि जिन्हें पट्टा दिया गया है, वे पात्र भी नहीं हैं। उसकी सत्यापन जांच क्यों नहीं की जाती है।
धर्मेन्द्र पाण्डेय के अनुसार उन्होंने लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार, एसडीएम, डीएम तक प्रार्थना पत्र दिए, परंतु हल्का लेखपाल द्वारा “पट्टा धारकों के कब्जे” का हवाला देकर अधिकारियों को गुमराह किया गया। धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय कहना है।कि इस प्रकरण में RTI के तहत मांगी गई सूचना भी अधूरी और भ्रामक दी गई, जो RTI एक्ट 2005 की धारा 6(1) व 7(1) का उल्लंघन है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा क्या कहते हैं।2006 (UP Revenue Code) की धाराएँ 33, 35, 67, 68, 122-B और 219सीधे इस मामले पर लागू होती हैं।ये धाराएँ अभिलेख संशोधन, नामांतरण सत्यापन और फर्जी कब्जों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी स्पष्ट करती हैं।
उल्लेख करते हुए कहा कि ग्राम समाज की भूमि पर गलत प्रविष्टि होने पर अभिलेख संशोधन व जांच अनिवार्य है, पर तहसील स्तर पर गुमराह व फाइल दबाई जा रही है। शिकायतकर्ता ने IGRS, जनशिकायत पोर्टल और रजिस्ट्री डाक के माध्यम से भी पूरा मामला उठाया, परंतु अब तक न तो जांच समिति गठित हुई और न ही स्थलीय सत्यापन किया गया।
यह मामला सीधे तौर पर राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही, सरकारी पारदर्शिता और सरकार के ज़ीरो टॉलरेंस नीति पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
हल्का लेखपाल ने बार-बार यह तर्क दिया कि “इगारह व्यक्तियों को पट्टा दिया गया, सभी गांव के ही लोग हैं”, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह पट्टे अपात्रों को दिए गए, या वास्तव में पात्रों को? दिया गया और क्या इन पट्टा धारकों के पास अन्य भूमि है या नहीं? इसी प्रकार मांगी गई जानकारी में पूरी स्पष्टता नहीं थी, जिससे राजस्व अभिलेखों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।अब समय आ गया है कि प्रशासन केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित न रहकर, सच्चाई और जनहित के पक्ष में तत्काल कार्रवाई करे।
धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन जांच को लेकर अगर कार्रवाई नहीं करता, तो वे उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेंगे। फिलहाल प्रशासन की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय नाराजगी बढ़ती जा रही है। क्यों की राजस्व विभाग ने अपने ही सरकारी जमीनों को भूमि माफियाओं के हवाले किया जा रहा है।





