

कुशीनगर (विशुनपुरा ब्लॉक):
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के विशुनपुरा विकास खंड अंतर्गत ग्राम सभा अहिरौली में एक बार फिर विकास कार्यों की पोल खुलने लगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि लाखों रुपये विकास योजनाओं के नाम पर खर्च दिखाए गए, लेकिन ज़मीनी हकीकत “जीरो डेवलपमेंट” (Zero Development) जैसी है — ना सड़कों की हालत सुधरी, ना नालियां बनीं, ना ही सार्वजनिक स्थलों का कोई कायाकल्प हुआ।
गांव में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ जब आवाज़ें उठीं, तो विरोध एक जन-आंदोलन का रूप लेता गया। शिव मंदिर परिसर में एकत्रित ग्रामीणों ने नारेबाज़ी करते हुए कहा कि “अगर विरोध करना बगावत है, तो हम बागी हैं… और हमारा मजहब बगावत है।”
ग्रामवासियों ने साफ़ शब्दों में वर्तमान ग्राम प्रधान और सचिव पर भ्रष्टाचार, घोटाले और फर्जी बिलिंग के आरोप लगाते हुए कहा कि विकास के नाम पर केवल कागज़ी योजनाएं बनाई गईं, जबकि धरातल पर कार्य शून्य है।
पंचायत फंड से करोड़ों रुपये के बजट का कोई अता-पता नहीं।
छठ घाट, सड़कों और नालियों का कार्य सिर्फ कागज़ों पर पूरा दिखाया गया।
सफाई व्यवस्था, पेयजल, और ग्राम पंचायत भवन की स्थिति बदहाल।
सचिव और प्रधान की मिलीभगत से “जीरो टॉलरेंस पॉलिसी” की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।
📢 पुजारी मणिन्द्र पाठक की अपील:
शिव मंदिर के पुजारी श्री मणिन्द्र पाठक ने जनता को संबोधित करते हुए कहा—
“गांव की आस्था और परंपरा को छलने वालों को अब जवाब देना होगा। विकास के नाम पर जो विनाश हुआ है, उसका हिसाब लिया जाएगा। अगर हम भी चुप रहे, तो बोलेगा कौन?”
उनकी यह वाणी सुनकर उपस्थित सैकड़ों ग्रामीणों ने तालियां बजाकर समर्थन जताया और पंचायत में खुले ऑडिट (Public Audit) तथा ब्लॉक-स्तरीय जांच की मांग उठाई।
ग्रामसभा की गूंज:
ग्रामीणों ने कहा कि शासन प्रशासन की “जीरो टॉलरेंस” नीति केवल फाइलों तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार खुलकर नाच रहा है। अगर शासन ने तत्काल संज्ञान नहीं लिया, तो पूरा गांव आंदोलन करेगा।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग:
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल जांच कराकर ग्राम प्रधान और सचिव के कार्यकाल में हुए सभी भुगतान और निर्माण कार्यों की RTI व जांच समिति से समीक्षा कराने की मांग की है।
अहिरौली ग्राम सभा का यह विरोध अब एक “विकास बनाम भ्रष्टाचार” की लड़ाई का रूप ले चुका है। ग्रामीणों की आवाज़ साफ है —
“अबकी बार विकास नहीं, जवाब चाहिए।”
सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने चुप्पी साधी रही, तो यह विरोध आगे ब्लॉक और ज़िला स्तर तक पहुँचेगा।
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“इस जुल्म के साए में लब खोलेगा कौन,
अगर हम भी चुप रहे, तो फिर बोलेगा कौन…”
