

विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर।
कुशीनगर जनपद के ऐतिहासिक बांसी मेला में प्रशासन की तैयारियों की पोल एक बार फिर खुल गई है। पुलिस अधीक्षक द्वारा 4 नवंबर शाम 4 बजे से 5 नवंबर शाम 4 बजे तक बड़े वाहनों की एंट्री पर रोक लगाते हुए रूट डाइवर्जन का सख्त आदेश जारी किया गया था, मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है।
डाइवर्जन कराने के लिए जगह-जगह दर्जनों पुलिसकर्मी तैनात हैं, पर बड़े वाहनों का काफिला फिर भी मेले क्षेत्र में बेहिचक प्रवेश कर रहा है। ट्रक, बसें और ट्रैक्टरों की आवाजाही से जहां जाम की स्थिति बन रही है, वहीं मेले में आने वाले श्रद्धालु और आम लोग परेशानी का सामना कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “कागज़ों में रूट डाइवर्जन हुआ है, ज़मीन पर तो सब कुछ जस का तस चल रहा है!” कई श्रद्धालु गाड़ियों के जाम में घंटों फंसे रहे, जबकि पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने नज़र आए।
कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाला यह मेला जिले का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है, जिसे लेकर हर साल प्रशासन विशेष तैयारी का दावा करता है। इस बार भी वही हुआ — आदेश जारी, पोस्टर लगे, लेकिन अमल ढीला।
लोगों का सवाल सीधा है — जब खुद एसपी के आदेश की इतनी अनदेखी हो रही है तो नीचे के स्तर पर अनुशासन की उम्मीद किससे की जाए?
मेले में उमड़ी भीड़ के बीच बेतरतीब वाहनों की आवाजाही न सिर्फ अव्यवस्था फैला रही है, बल्कि किसी बड़ी दुर्घटना का खतरा भी पैदा कर रही है।
प्रशासन अब भी “कड़ी कार्रवाई” के बयान दे रहा है, मगर फिलहाल बांसी मेले में रूट डाइवर्जन आदेश कागज़ पर, और भारी वाहन सड़कों पर ही नजर आ रहे हैं।
