
संतकबीरनगर के जिलाधिकारी आलोक कुमार की अदालत ने उदय प्रताप नारायण चतुर्वेदी की अपील को खारिज कर दिया है। यह मामला ग्राम भिटहा, तप्पा फिदाईपुर, तहसील धनघटा की बंजर भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़ा है। तहसीलदार धनघटा की अदालत ने 3 जून 2025 को उदय प्रताप चतुर्वेदी के खिलाफ बेदखली का आदेश पारित किया था।उदय प्रताप चतुर्वेदी ने जिलाधिकारी न्यायालय में अपील की थी कि उन्होंने अपनी निजी भूमि की सुरक्षा के लिए चारदीवारी बनाई है, न कि अवैध कब्जा किया है। लेकिन सरकारी पक्ष ने दलील दी कि चतुर्वेदी ने बंजर भूमि पर पक्का निर्माण कर कब्जा किया है।
जिलाधिकारी ने चकबंदी लेखपाल और तहसील लेखपाल की संयुक्त रिपोर्ट और अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर पाया कि गाटा संख्या 33मि की 0.075 हेक्टेयर बंजर भूमि पर मकान और सहन के रूप में कब्जा किया गया है। न्यायालय ने कहा कि बंजर भूमि कृषि जोत की श्रेणी में नहीं आती और उस पर कब्जाधारी को किसी प्रकार का स्वत्व लाभ नहीं दिया जा सकता। इसलिए, जिलाधिकारी ने उदय प्रताप चतुर्वेदी की अपील को निरस्त कर दिया और तहसीलदार धनघटा का बेदखली आदेश बरकरार रखा।
उदय प्रताप चतुर्वेदी एक समाजसेवी हैं, जिन्होंने कई गरीब परिवारों की मदद की है। वह सूर्या एकेडमी के निदेशक हैं और उन्होंने कई सामाजिक कार्यों में भाग लिया है, जैसे कि गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करना और वस्त्र वितरण करना। उनके सामाजिक कार्यों की वजह से उन्हें समाज में एक अच्छी पहचान मिली हुई है।
