
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर जिले की तमकुहीराज तहसील एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यशैली को लेकर सवालों के घेरे में है। ताजा मामला सेवरही थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरा मुस्तकिल अगरवा का है, जहां एक वृद्ध और विकलांग व्यक्ति की भूमि के नक्शे में कथित रूप से बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के तरमीम कर दिए जाने का आरोप सामने आया है। इस पूरे प्रकरण ने तहसील प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
पीड़ित प्रहलाद गुप्ता पुत्र शंकर, जो वर्तमान में चौपथिया में रह रहे हैं, ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि क्षेत्र के कानूनगो जयंत कुमार ने बिना किसी वैधानिक आदेश के उनके गाटा संख्या की भूमि का नक्शा बदल दिया। जब प्रहलाद गुप्ता ने अपनी जमीन की नकल निकलवाई तो उन्हें पता चला कि उनके भूखंड का नक्शा पहले ही तरमीम कर दिया गया है। इस पर जब उन्होंने संबंधित कानूनगो से स्पष्टीकरण मांगा तो कथित रूप से उन्हें टालते हुए कहा गया, “मैं क्या जानूं, आपको जो करना है करिए।”

पीड़ित का कहना है कि इस मनमानी कार्रवाई से उनकी भूमि पर लाखों रुपये के नुकसान का खतरा पैदा हो गया है। एक वृद्ध और विकलांग व्यक्ति के साथ इस प्रकार की कार्यशैली न केवल संवेदनहीनता को दर्शाती है, बल्कि राजस्व व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करती है।
स्थानीय सूत्रों की मानें तो संबंधित कानूनगो लंबे समय से तमकुहीराज तहसील में तैनात हैं और अपने कार्यक्षेत्र सेवरही में ही स्थायी रूप से रह रहे हैं। क्षेत्र में उनकी कार्यप्रणाली और कथित अवैध कमाई को लेकर भी चर्चाएं लंबे समय से होती रही हैं। ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि यदि लोकायुक्त या उच्च स्तरीय एजेंसी द्वारा उनकी संपत्ति की जांच करा दी जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब एक विकलांग और असहाय व्यक्ति की जमीन के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा सकता है, तो आम ग्रामीणों की स्थिति क्या होगी। पीड़ित प्रहलाद गुप्ता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और उनकी भूमि के नक्शे में की गई कथित तरमीम को निरस्त कर उन्हें न्याय दिलाया जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में राजस्व व्यवस्था में जवाबदेही तय हो पाती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
