


विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
सेवरही/कुशीनगर। कहते हैं कि मेहनत, लगन और परिवार का साथ मिल जाए तो सफलता खुद रास्ता तलाश लेती है। नगर पंचायत सेवरही की बहू कृतिका पाण्डेय ने इसी कहावत को सच साबित करते हुए जीव विज्ञान विषय में पीएचडी की उपाधि हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ा दिया है। जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आई, बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया और लोगों ने इसे सेवरही के लिए गर्व का क्षण बताया।
नगर पंचायत सेवरही के वरिष्ठ समाजसेवी कृष्ण मुरारी तिवारी की पुत्रवधू कृतिका पाण्डेय ने पटना यूनिवर्सिटी से जीव विज्ञान विषय में शोध कार्य पूरा कर यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उनकी इस सफलता को लेकर क्षेत्र में खुशी की लहर है और लोग इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उपलब्धि मान रहे हैं।
डॉ. कृतिका पाण्डेय ने अपनी सफलता के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर भावुक शब्दों में आभार व्यक्त करते हुए लिखा कि इस उपलब्धि के पीछे उनके जीवन साथी विशाल तिवारी का सबसे बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने लिखा कि कठिन समय में पति का सहयोग, विश्वास और समझ ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
डॉ. कृतिका पाण्डेय की इस उपलब्धि पर उनके पिता श्रवण पाण्डेय व माता संध्या पाण्डेय (पूर्व वार्ड पार्षद, गोरखपुर) ने गर्व व्यक्त किया और कहा कि शिक्षा ही समाज को नई दिशा देती है। वहीं सेवरही क्षेत्र के कई गणमान्य लोगों ने भी इसे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि बताया।
बधाई देने वालों में सेवरही ब्लॉक प्रमुख डॉ. अन्नू धनंजय तिवारी, पूर्व ब्लॉक प्रमुख सोनमती देवी, एसडीओ विकास तिवारी, पैक्स अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश तिवारी, भाजपा के पूर्व क्षेत्रीय मंत्री अजय तिवारी, संजय तिवारी, संवेदक अजय तिवारी, शशि प्रताप तिवारी, रवि तिवारी, पत्रकार मनीष तिवारी और विकास तिवारी सहित कई सामाजिक व राजनीतिक हस्तियों ने हर्ष व्यक्त किया।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जब बेटियां और बहुएं शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करती हैं तो यह पूरे समाज के लिए संदेश होता है कि ज्ञान ही असली ताकत है। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कटाक्ष किया कि जहां कई जगहों पर शिक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती है, वहीं सेवरही की बहू ने वास्तविक शोध कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
कुल मिलाकर डॉ. कृतिका पाण्डेय की यह उपलब्धि सिर्फ एक डिग्री नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा और वर्ष 2026 के लिए एक सकारात्मक संदेश मानी जा रही है।
