
गोरखपुर, 23 नवंबर 2025।
गोरखपुर जोन से प्राप्त आधिकारिक रिपोर्ट ने आत्महत्या से जुड़ी घटनाओं का एक बेहद गंभीर और चिंताजनक चित्र सामने रखा है। वर्ष 2021 से नवंबर 2025 तक के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि पुरुषों और महिलाओं दोनों में आत्महत्या के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, महराजगंज और अन्य जिलों में पिछले पाँच वर्षों के दौरान हजारों लोगों ने विभिन्न कारणों से अपनी जानें गंवाईं।
साल दर साल बढ़ता संकट
2021 में कुल 591 केस दर्ज किए गए थे।
2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 772 तक पहुंच गया।
2023 में घटनाएं और बढ़ीं, कुल 808 मामलों के साथ।
2024 में आत्महत्याओं की संख्या 908 तक पहुंच गई — जो कि सबसे अधिक है।
2025 में जनवरी से 21 नवंबर तक ही 1007 मामले दर्ज हो चुके हैं, जो इस साल के अंत तक रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ा होने का संकेत दे रहे हैं।
पुरुषों बनाम महिलाओं का आँकड़ा
आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों में आत्महत्या की संख्या महिलाओं की तुलना में लगभग दोगुनी है।
रिपोर्ट कहती है कि आर्थिक दबाव, बेरोजगारी, पारिवारिक तनाव और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं—मुख्य कारणों में शामिल हैं।
कुशीनगर, गोरखपुर और महराजगंज सबसे अधिक प्रभावित
इन जिलों में हर वर्ष सैकड़ों लोग आत्महत्या जैसी भयावह स्थिति में धकेल दिए गए। कई जिलों में 2024 और 2025 के आंकड़े पिछले वर्षों से काफी अधिक दर्ज हुए, जो स्थिति को और भी गंभीर बनाते हैं।
जोन स्तर पर कुल आँकड़ा
पुरुष — 2253 मामले
महिलाएं — 4096 मामले
(2021 से 21 नवंबर 2025 तक)
ये आंकड़े उस मानसिक स्वास्थ्य संकट की गहरी छाया को उजागर करते हैं जिसे समाज अक्सर नजरअंदाज करता है। यह रिपोर्ट प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और समाजिक संस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि अब ठोस प्रयासों की आवश्यकता है—ताकि इस बढ़ते आत्महत्या ग्राफ को थामने के लिए सामुदायिक और संस्थागत स्तर पर कारगर कदम उठाए जा सकें।
