
23 जनवरी | विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर
प्रदेश में मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, पारदर्शी और समावेशी बनाने की दिशा में भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 (SIR-2026) के तहत सख्त लेकिन सुविधाजनक कदम उठाया है। आलेख्य मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद उन मतदाताओं को क्रमबद्ध रूप से नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिनकी मैपिंग विशेष गहन पुनरीक्षण-2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सकी है। यह प्रक्रिया प्रदेशभर में निर्वाचन नियमों के अनुरूप संचालित की जा रही है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया कि आयोग के मूल उद्देश्य “कोई मतदाता न छूटे” को साकार करने के लिए निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम-18 के अंतर्गत सुनवाई को सरल बनाया गया है। अब व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी। जो मतदाता किसी कारणवश उपस्थित नहीं हो सकते, वे लिखित रूप से अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से सुनवाई करा सकते हैं—यह निर्णय आम मतदाता के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
डिजिटल सुविधा को प्राथमिकता देते हुए आयोग ने ऑनलाइन जवाब देने की व्यवस्था लागू की है। मतदाता voters.eci.gov.in पर लॉगिन कर नोटिस की स्थिति देख सकते हैं और Submit Documents Against Notice Issue विकल्प के माध्यम से आवश्यक अभिलेख अपलोड कर सकते हैं। इसके साथ-साथ बीएलओ द्वारा भी नोटिस उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि कोई मतदाता जानकारी से वंचित न रहे।
अभिलेख प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जन्मतिथि के आधार पर स्पष्ट रूप से वर्गीकृत की गई है—
• 01 जुलाई 1987 से पूर्व जन्म: केवल स्वयं के अभिलेख पर्याप्त।
• 01 जुलाई 1987 से 02 दिसंबर 2004 के बीच जन्म: स्वयं + माता/पिता में से किसी एक के अभिलेख।
• 02 दिसंबर 2004 के बाद जन्म: स्वयं + माता एवं पिता दोनों के अभिलेख अनिवार्य।
जन्मतिथि/जन्मस्थान के प्रमाण के लिए पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, सरकारी/पीएसयू पहचान पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर, भूमि/मकान आवंटन प्रमाण, वन अधिकार प्रमाण पत्र, एनआरसी (जहां उपलब्ध), आधार (ईसीआई निर्देशानुसार) सहित अनेक वैध विकल्प निर्धारित किए गए हैं। बिहार SIR मतदाता सूची (संदर्भ तिथि 01.07.2025) का अंश भी मान्य होगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कड़ी अपील करते हुए कहा कि नोटिस प्राप्त होते ही निर्धारित समयसीमा में अभिलेख उपलब्ध कराएं, ताकि मतदाता सूची अधिक सटीक, विश्वसनीय और समावेशी बन सके। प्रशासन का संदेश साफ है—सहयोग करें, अधिकार सुरक्षित
