
23 जनवरी | विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
बाल श्रम के विरुद्ध जनपद कुशीनगर में प्रशासन ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रभावी कार्रवाई की है। श्रम विभाग, पुलिस विभाग एवं चाइल्ड लाइन की संयुक्त टीम ने दिनांक 19 जनवरी 2026 को एनएच-28 कुशीनगर स्थित ढाबों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान एक ढाबे पर नाबालिग बच्चे से अवैध रूप से काम कराए जाने का गंभीर मामला सामने आया, जिस पर तत्परता दिखाते हुए टीम ने बाल श्रमिक को मौके से मुक्त कराया।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने बताया कि बाल श्रमिक से कार्य लेने वाले सेवायोजक/ढाबा संचालक के विरुद्ध बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) अधिनियम की सुसंगत धाराओं में विधिक कार्रवाई की गई है। यह स्पष्ट किया गया कि बाल श्रम कराना कानूनन गंभीर अपराध है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने आमजन को कड़ी चेतावनी देते हुए बताया कि बाल श्रम कराने पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 06 माह से 02 वर्ष तक की कैद तथा 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है। कानून का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध प्रशासन भविष्य में भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रखेगा।
प्रशासन ने यह भी दोहराया कि शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक बचपन हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। बच्चों को मजदूरी में झोंकना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि समाज के भविष्य के साथ अपराध भी है। ऐसे मामलों में जनसहयोग अत्यंत आवश्यक है। यदि कहीं भी बाल श्रम की सूचना मिलती है तो तत्काल श्रम विभाग, पुलिस या चाइल्ड लाइन को सूचित करें।
इस अभियान में श्रम प्रवर्तन अधिकारी अलंकृता उपाध्याय, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग पुलिस कुशीनगर के प्रभारी निरीक्षक विद्याधर कुशवाहा, मुकेश यादव, चाइल्ड लाइन से मोहन लाल, मानस, आदित्य, अभिषेक कुमार श्रीवास्तव एवं शशि शेखर मिश्र सक्रिय रूप से सम्मिलित रहे।
प्रशासन की यह कार्रवाई न केवल कानून तोड़ने वालों के लिए कड़ा संदेश है, बल्कि समाज को यह याद दिलाने वाली भी है कि बाल श्रम नहीं, बाल शिक्षा ही राष्ट्र निर्माण की नींव है।
