





विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
दिनांक: 04 फरवरी 2026
महिला उत्पीड़न की रोकथाम और पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग ने सदर तहसील पड़रौना में सख्त तेवरों के साथ महिला जनसुनवाई का आयोजन किया। लखनऊ से आई आयोग की सदस्य श्रीमती जनक नन्दनी की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया कि महिलाओं से जुड़े मामलों में अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जनसुनवाई में तहसील और जिला स्तर के अधिकारियों की व्यापक मौजूदगी रही। तहसीलदार अभिषेक मिश्र, नायब तहसीलदार राजेश कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी डी.सी. त्रिपाठी, पीआरओ ओमप्रकाश तिवारी, डीएमसी नलिन सिंह, सेंटर मैनेजर रीता यादव सहित महिला आयोग और चाइल्ड हेल्पलाइन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंच से ही यह साफ कर दिया गया कि प्रत्येक शिकायत का जवाबदेह निस्तारण तय समय में अनिवार्य है।
महिला आयोग की सदस्य ने राशन कार्ड, जननी सुरक्षा योजना, पुष्टाहार, आवास, पुलिस और बैंक से जुड़े मामलों की गहन समीक्षा की। जनसुनवाई के दौरान कुल 40 प्रकरण सामने आए, जिनमें पुलिस और राशन कार्ड से जुड़े मामले सबसे अधिक रहे। 05 मामलों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया, जबकि शेष मामलों में संबंधित विभागों को सात दिनों के भीतर स्पष्ट आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए। आयोग की सख्त टिप्पणी रही कि “फाइलों में दबे मामलों का समय अब समाप्त हो चुका है।”
इसके बाद श्रीमती जनक नन्दनी ने जिले के प्रमुख महिला और बाल कल्याण संस्थानों का औचक निरीक्षण किया। वन स्टॉप सेंटर, दत्तक ग्रहण इकाई, संयुक्त जिला चिकित्सालय, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय और आंगनवाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं को परखा गया। निरीक्षण के दौरान जहां संतोषजनक कार्यों की सराहना हुई, वहीं कमियों पर अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश भी दिए गए।
विकास भवन में आयोजित जनजागरूकता चौपाल में समूह की महिलाओं से सीधा संवाद कर उन्हें कानूनी अधिकारों, सरकारी योजनाओं और महिला सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। आयोग सदस्य ने स्पष्ट कहा कि जागरूक महिला ही सुरक्षित महिला है और प्रशासन का दायित्व है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में आंगनवाड़ी केंद्र जंगल खिरकिया, पड़रौना में गोद भराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम आयोजित हुआ। चार गर्भवती महिलाओं को पुष्टाहार वितरित किया गया तथा दो नवजात शिशुओं का अन्नप्राशन कराया गया। समापन पर आयोग सदस्य द्वारा वृक्षारोपण कर सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का भी संदेश दिया गया।
यह जनसुनवाई केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए चेतावनी और महिलाओं के लिए भरोसे का मंच बनकर सामने आई।
