

17 दिसम्बर | विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर
बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के विरुद्ध जनपद कुशीनगर में जागरूकता की सशक्त लहर देखने को मिली। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत विकास खण्ड विशुनपुरा स्थित नेहरू इंटर कॉलेज, मंशा छापर में एक प्रभावशाली एवं प्रेरक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें छात्र–छात्राओं को बाल विवाह के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए इसे जड़ से समाप्त करने का संकल्प दिलाया गया।
कार्यक्रम में जिला प्रोबेशन अधिकारी डी.सी. त्रिपाठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास पर घातक प्रभाव डालता है। उन्होंने छात्र–छात्राओं से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें और समाज में भी इस बुराई के खिलाफ आवाज उठाएं।
हब फॉर इम्पावरमेंट ऑफ वूमेन की टीम के डिस्ट्रिक्ट मिशन कोऑर्डिनेटर नलिन सिंह ने बाल विवाह के सामाजिक, स्वास्थ्यगत और कानूनी दुष्परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि बाल विवाह एक पीढ़ी को अंधकार की ओर धकेल देता है। उन्होंने शिक्षा को ही सशक्त भविष्य की कुंजी बताया।
कार्यक्रम में जेंडर स्पेशलिस्ट श्रीमती प्रीती सिंह ने महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं—निराश्रित महिला पेंशन योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य), वन स्टॉप सेंटर—की विस्तृत जानकारी देकर छात्राओं और अभिभावकों को लाभ लेने हेतु प्रेरित किया।
काउंसलर मानस मिश्रा ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की उपयोगिता बताते हुए कहा कि किसी भी संकट की स्थिति में यह बच्चों के लिए सुरक्षा कवच है। वहीं श्रीमती बंदना गुप्ता ने विशेष दत्तक ग्रहण इकाई की भूमिका पर प्रकाश डाला। श्रीमती बंदना कुशवाहा ने 1098, 181, 1090, 112, 108 व 102 जैसी महत्वपूर्ण हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी देकर इनके त्वरित उपयोग पर बल दिया।
कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित छात्र–छात्राओं एवं जनसमूह ने बाल विवाह न करने और रोकने की दृढ़ शपथ ली। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य साधु शरण पांडे, शिक्षकगण, महिला कल्याण विभाग के दिनेश कुमार सहित सैकड़ों छात्र–छात्राएं मौजूद रहीं। कार्यक्रम ने समाज में स्पष्ट संदेश दिया—अब बाल विवाह नहीं, केवल शिक्षा और सशक्त भविष्य।
