
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता अमित कुमार कुशवाहा
कुशीनगर जनपद में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ने एक बार फिर बड़ा परिणाम दिया है। एनएच-28 पर खुद को जीएसटी अधिकारी बताकर ट्रक चालकों से अवैध वसूली करने वाले संगठित गिरोह का पटहेरवा पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। इस कार्रवाई ने न सिर्फ हाईवे पर सक्रिय फर्जीवाड़े का चेहरा उजागर किया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि अब अपराधियों के लिए कुशीनगर की जमीन आसान नहीं रही।
पूरी कार्रवाई में थानाध्यक्ष पटहेरवा धीरेन्द्र कुमार राय की रणनीतिक सूझबूझ और टीम की सतर्कता निर्णायक साबित हुई। लंबे समय से सक्रिय इस गिरोह को पकड़ना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था, लेकिन सटीक सूचना, तेज कार्रवाई और मजबूत घेराबंदी ने इस खेल का अंत कर दिया।
उच्च अधिकारियों की निगरानी में चला ऑपरेशन
इस पूरे अभियान को पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ वर्मा के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी तमकुहीराज के कुशल पर्यवेक्षण में अंजाम दिया गया। थानाध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार राय के नेतृत्व में गठित टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए गिरोह की कमर तोड़ दी।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपी बेहद शातिर तरीके से वारदात को अंजाम देते थे और खासतौर पर बाहरी राज्यों के ट्रकों को निशाना बनाते थे, ताकि डर और भ्रम का फायदा उठाकर मोटी रकम वसूली जा सके।
गिरफ्तार आरोपी—युवाओं के चेहरे में छिपा अपराध का जाल
पुलिस ने जिन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान गोविंद शर्मा (उम्र करीब 19 वर्ष, निवासी गाजीपुर, थाना तमकुहीराज) और संदीप यादव (उम्र करीब 22 वर्ष, निवासी लवकुश पश्चिमपट्टी, थाना तुर्कपट्टी) के रूप में हुई है। देखने में सामान्य युवक, लेकिन इनके पीछे एक संगठित अपराध का पूरा नेटवर्क खड़ा था।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये दोनों अपने साथियों—गोविंद मद्वेशिया और बृजेश भारती उर्फ प्रिंस—के साथ मिलकर हाईवे पर सक्रिय एक गिरोह चला रहे थे। यह गिरोह योजनाबद्ध तरीके से ट्रकों, डीसीएम और ट्रेलरों को निशाना बनाता था।
वारदात का तरीका—डर, दबाव और फर्जी पहचान का खेल
गिरोह का तरीका बेहद चौंकाने वाला और सुनियोजित था। सदस्य एनएच-28 पर गुजरने वाले वाहनों की पहचान करते, खासकर वे ट्रक जो दूसरे राज्यों से आते थे। चलते वाहनों की फोटो खींचकर उनमें लिखे मोबाइल नंबर हासिल किए जाते और फिर फोन कॉल का सिलसिला शुरू होता।
फोन पर खुद को जीएसटी अधिकारी बताकर चालकों को कागजात में गड़बड़ी का डर दिखाया जाता। इसके बाद वाहन को जबरन रुकवाया जाता और मौके पर पहुंचकर अवैध वसूली की जाती। कई मामलों में चालकों को धमकाया जाता कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो वाहन जब्त कर लिया जाएगा या कानूनी कार्रवाई में फंसा दिया जाएगा।
एक शिकायत ने खोला पूरा राज
इस पूरे मामले का खुलासा हरियाणा के सिरसा निवासी ट्रक चालक राम ऋषि की तहरीर से हुआ। 26 मार्च की शाम करीब 4 बजे उन्हें फोन कर उनकी गाड़ी को “फर्जी माल” बताकर एनएच-28 पर फाजिलनगर के आगे एसआर पेट्रोल पंप के पास रुकवा लिया गया।
इसके बाद आरोपियों ने खुद को जीएसटी अधिकारी बताते हुए उनसे 1 लाख 80 हजार रुपये की मांग की। विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकी दी गई। इस भयावह स्थिति के बावजूद पीड़ित ने साहस दिखाया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। यही शिकायत पूरे गिरोह के लिए काल साबित हुई।
पुलिस की रणनीति—चेकिंग से घेराबंदी तक
घटना की गंभीरता को देखते हुए थानाध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार राय ने तत्काल विशेष टीम गठित की और एनएच-28 पर सघन चेकिंग अभियान शुरू कराया। संदिग्ध वाहनों और गतिविधियों पर पैनी नजर रखी गई।
28 मार्च की सुबह करीब 6:50 बजे पुलिस को सफलता मिली। काजीपुर कट से लगभग 150 मीटर पहले घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया, जिससे यह साफ हो गया कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था।
कानूनी शिकंजा और आगे की कार्रवाई
इस मामले में थाना पटहेरवा पर मु0अ0सं0 63/2026 के तहत धारा 308(5), 111(2), 318(4) बीएनएस एवं 207 मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है और गिरोह के अन्य संभावित कनेक्शन की भी जांच कर रही है।
टीमवर्क बना सफलता की कुंजी
इस सराहनीय कार्रवाई में थानाध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार राय के साथ उपनिरीक्षक राम प्रवेश सिंह, सच्चिदानन्द यादव, अनुराग यादव, श्रवण कुमार, हेड कांस्टेबल राम प्रवेश यादव, शंखधर राय, कांस्टेबल अजय यादव और अमित कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूरी टीम ने समन्वय और सतर्कता के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।
पुलिस की सख्त चेतावनी और अपील
क्षेत्राधिकारी तमकुहीराज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि थानाध्यक्ष की सतर्कता और टीम की त्वरित कार्रवाई के कारण ही इस गिरोह का पर्दाफाश संभव हो सका। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ऐसे अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त अभियान चलाती रहेगी।
पुलिस ने वाहन चालकों और आम जनता से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर इस प्रकार की वसूली करता है, तो बिना डरे तत्काल नजदीकी थाने में सूचना दें। जागरूकता ही ऐसे अपराधों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।
हाईवे पर फैले डर का अंत—कानून का संदेश साफ
पूरे मामले ने यह उजागर कर दिया है कि किस तरह कुछ लोग फर्जी पहचान के सहारे कानून को चुनौती देने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन कुशीनगर पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब ऐसे गिरोहों के लिए कोई जगह नहीं है।
एनएच-28 पर चल रहा यह ‘फर्जी जीएसटी अफसर’ का खेल अब खत्म हो चुका है, लेकिन पुलिस की नजरें अभी भी सतर्क हैं। यह कार्रवाई न सिर्फ अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि आम जनता के लिए भरोसे का संदेश भी—कि कानून जाग रहा है, और अब हर साजिश का अंत तय है।


