
कुशीनगर
मा० सदस्य, राज्य पिछडा आयोग फूलबदन कुशवाहा, के द्वारा शिकायत की गयी, जिसमें कुशीनगर स्थित मदरसा अंजुमन इस्लामिया फैजुल उलूम धनौजी खुर्द फाजिलनगर जनपद कुशीनगर के प्रबंधक द्वारा कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत कर वर्षों से सरकार के पैसे का दोहन किया जा रहा है। उपरोक्त लिखित मदरसा वर्ष 1996 में अनुदान पर आया था। हैरानी की बात यह है कि उक्त मदरसे के पास अपना कोई जमीन नहीं है। ग्राम सभा धनौजी के बंजर जमीन पर अतिक्रमण करते हुए कब्जा किया गया तथा अतिक्रमण वाले जमीन पर भवन तैयार करारक मदरसा संचालित किया जा रहा है।
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर द्वारा उक्त शिकायत की जाँच अपर जिलाधिकारी (वि०/रा०) से करायी गयी। जॉच में बोर्ड आफ रेवेन्यू से समन्वय स्थापित कर वाद की डिजिटल हिस्ट्री निकाली गयी और पाया गया कि पत्रावली में बार कोडेड आदेश पत्रक पर कम्प्यूटर टंकित आदेश दिनांक 10.07.2023 अवस्थित है, जिसके बार कोड को स्कैन किया गया तो ज्ञात हुआ कि उक्त बार कोडेड आदेश पत्रक किसी अन्य वाद का है, प्रश्नगत वाद से संबंधित आदेश पत्रक नहीं है। (उक्त आदेश पत्रक उप जिलाधिकारी न्यायालय में योजित वाद संख्या-टी201805440401343 से लिया गया है न कि प्रश्नगत वाद संख्या-टी-202105440408286 से) तथा उक्त आदेश पत्रक पर ऊपर तरफ संबंधित वेवपोर्टल का यू०आर०एल० एवं नीचे पेज संख्या एवं दिनांक व समय अंकित नहीं है (जबकि पोर्टल से प्रिन्टेड आदेश पत्रक पर उक्त सूचनाएं अंकित होती है) तथा उक्त आदेश पत्रक पर अंकित न्यायालय, वाद संख्या, नाम बनाम एवं धारा भी कूटरचित है। इस प्रकार उक्त आदेश दिनांक 10.07.2023 कूट रचित है।
पत्रावली में उपलब्ध फर्दकाम पत्रक का अवलोकन किया गया, दावा वादी के पृष्ठ भाग को फर्दकाम पत्रक बनाया गया है, जिसपर दि० 13.03.2023 को अंकित है कि “आज अधिवक्तागण के प्रस्ताव के कारण सुनवाई दिनांक 15.05.2023 को पेश हो। तदोपरान्त दिनांक 07.04.2023 को वाद से संबंधित पोर्टल से आदेश पत्रक प्रिन्ट कर पत्रावली में संलग्न किया गया है. जिसपर दिनांक 19.06.2023 एवं 10.07.2023 का फर्दकाम अंकित है। उक्त पत्रावली पर पीठासीन अधिकारी के हस्ताक्षर फर्दकाम (आदेश-पत्रक) पर तीन जगह पाये गये है. 1-फर्दकाम दिनांक 15.05.2023, 2-फर्दकाम दिनांक 10.07.2023 एवं 3-संलग्न आदेश पत्र पर। आर्डरशीट दिनांक 15.05.2023 के परीक्षण में पाया गया कि आर्डरशीट दिनांक 07.04.2023 को 2.42PM पर आरसीएमएस पोर्टल से प्रिन्ट किया गया है, किन्तु जब 07.04.2023 को आर्डरशीट (जिसमें दो पन्ने प्रिन्ट किए गए थे) पर दिनांक 15.05.2023 का फर्दकाम अंकित होना चाहिए, किन्तु वह दि० 07.04.2023 के आर्डरशीट पर न होकर पिछले फर्दकाम पर अंकित है, जिससे यह स्पष्ट है कि उक्त पत्रावली पर अंकित वाद में फर्दकाम पर खाली स्थान का लाभ उठाकर अंकित किया है। उक्त वाद संख्या-टी-202105440408286 के डिजिटल लॉग में पाया गया कि उक्त आदेश दिनांक 10.07.2023 भी दिनांक 25.07.2023 को तत्कालीन पीठासीन अधिकारी के दिनांक 24.07. 2023 को स्थानान्तरण के उपरान्त अपलोड किया गया है तथा आर्डरशीट के लॉग के अवलोकन से स्पष्ट है कि दिनांक 25.07.2023 को पीठासीन अधिकारी के जाने के बाद बैकडेट में जाकर अगली सुनवाई की तिथि दिनांक 10.07.2023 नियत की गयी, जिसमें प्रतिक्षा नोटिस तामिला थी एवं दिनांक 10.07.2023 के उपरान्त दिनांक 18.07.2023 को पत्रावली के आर्डरशीट में दिनांक 04. 09.2023 की तिथि “प्रतीक्षा नोटिस तामिला” में की गयी थी।
उक्त के अतिरिक्त तहसीलदार कसया की आख्या दिनांक 22.10.2021 में वर्णित रिपोर्ट में भूमि के विवरण और उसके कब्जे के बाद एक लाइन दूसरी कलम एवं दुसरे हस्तलेख में “वादी के नाम आवादी वर्ग 6(2) दर्ज किया जाना न्याय संगत है” अंकित होने के कारण प्रथम दृष्टया कूटरचित है।
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली, 2016 के धारा-68 के नियम (2) में यह व्यवस्था दी गयी है कि “जहाँ धारा-64 की उपधारा (1) में अभिदिष्ट किसी व्यक्ति ने किसी खातेदार की (जो सरकारी पट्टेदार न हो) किसी भूमि पर मकान बनाया हो और ऐसा मकान 29 नवम्बर, 2000 को विद्यमान हो, तो यह समझा जायेगा कि मकान का स्वामी ऐसे मकान के स्थल को निम्नलिखित निबन्धन और शर्तों पर धारण किये हैः- (क) संहिता की धारा-67-क (2) अथवा तद्न्तर्गत बनी नियमावली के अधीन बन्दोबस्त किये जाने वाले स्थल का अधिकतम क्षेत्रफल 200 वर्गमीटर से अधिक नहीं होगा, जबकि विषयांकित प्रकरण में 240 वर्गमीटर बन्दोबस्त किया गया है तथा किसी व्यक्ति को न करके एक संस्था को किया गया है, जो अवैध पाया गया।
उक्त विषय में विडियो कॉल से तत्कालीन उप जिलाधिकारी एवं तत्कालीन पेशकार से पूछताछ की गयी और तदोपरान्त जाँच में पाया गया कि वाद संख्या-टी-202105440408286 (8286/2021) अजुमन इस्लामिया फैजुल उलूम द्वारा प्रबन्धक सेराज अहमद बनाम उ०प्र० सरकार अन्तर्गत धारा-67 (क) उ०प्र०रा०सं०-2006 की पत्रावली में संलग्न आदेश दिनांक 10.07.2023 एवं दिनांक 07.04.2023 के आदेश पत्रक पर अंकित फर्दकाम एवं 15.05.2023 को पहले फर्दकाम (वाद पत्र के पृष्ठ भाग पर) अंकित आदेश कूटरचित है। साथ ही साथ तहसीलदार कसया की आख्या दिनांक 22.10.2021 में भी कूटरचना की गयी है। उक्त न्यायालय के पीठासीन अधिकारी सुश्री रत्नीका श्रीवास्तव का स्थानान्तरण होने के उपरान्त उनके द्वारा दिनांक 24.07.2023 को उक्त न्यायालय से कार्यमुक्त हो गयी थी, जबकि उनके कार्यमुक्त होने के उपरान्त दिनांक 25.07.2023 को पोर्टल पर दिनांक 10.07.2023 की तिथि नियत की गयी है। इस प्रकार पत्रावली में उपरोक्तानुसार की गयी कूटरचनाएं पीठासीन अधिकारी के स्थानान्तरण कार्यमुक्त होने के उपरान्त की गयी है। विषयांकित प्रकरण में लाभार्थी एवं तहसील कर्मियों द्वारा दुरभिसंधि कर कूटरचित आदेश अंकित किया गया है।
जिसके उपरान्त संबंधित प्रकरण को दुरूस्त करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा उप जिलाधिकारी कसया को निर्देशित किया गया, जिसके क्रम में प्रकरण को दुरूस्त कर संबंधित दोषी कर्मचारी को निलम्बित कर लाभार्थी सेराज अहमद, प्रबन्धक, अर्जुमन इस्लामिया फैजुल उलूम तथा तत्कालीन पेशकार के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी गयी।
