
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
दुदही ब्लॉक से रिपोर्ट — सुरेन्द्र कुमार रौनियार
कुशीनगर जनपद के दुदही ब्लॉक में आंगनवाड़ी व्यवस्था पर अब विभाग का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। केंद्र संचालन में लापरवाही और विभागीय कार्यों में उदासीनता बरतने के आरोप में एक दर्जन आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया है। बताया जा रहा है कि कई केंद्र महीनों से बंद पड़े थे, जबकि कार्यकत्रियां या तो दूसरे ब्लॉक में रह रही थीं या किसी और राज्य में जाकर बस गई थीं — और विभाग को भनक तक नहीं थी!
मुख्य सेविकाओं की रिपोर्ट पर सीडीपीओ दुदही ने जांच करवाई, जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कहीं तालेबंद केंद्र मिले तो कहीं रजिस्टरों में फर्जी हाजिरी दर्ज मिली। जांच टीम के सामने कई कार्यकत्रियों का जवाब भी उतना ही “औपचारिक” रहा जितना उनके केंद्रों का संचालन। अब विभाग ने इन सभी को एक सप्ताह का अल्टिमेटम दिया है — या तो जवाब दें, या फिर कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
सूत्रों की मानें तो विभागीय अधिकारियों को पहले से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ आंगनवाड़ी केंद्र केवल कागज़ों पर ही चल रहे हैं। बच्चों को पौष्टिक आहार और सेवाएं मिलने के बजाय योजनाएं फाइलों में दबी रह गईं। यही नहीं, कुछ कार्यकत्रियों की उपस्थिति दूसरे प्रदेशों में पाई गई — जबकि उनके केंद्रों पर “हाजिरी” रोज़ लग रही थी।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई महज़ शुरुआत है। आने वाले दिनों में सभी ब्लॉकों के केंद्रों की विशेष जांच होगी। सीडीपीओ दुदही ने साफ कहा — “जो केंद्र नहीं चलेंगे, वहां जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई तय है।”
गांवों में चर्चा गर्म है कि आखिर विभाग इतने लंबे समय तक आंखें मूंदे क्यों बैठा रहा? क्या अब जाकर “जवाबदेही” की नींद खुली है?
अगर यह सख्ती बरकरार रही, तो हो सकता है कि दुदही की यह कार्रवाई पूरे जनपद में आंगनवाड़ी व्यवस्था को झकझोर दे — वरना कागज़ों पर चल रहे ये केंद्र यूं ही बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करते रहेंगे।
