
21 जनवरी, विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर।
कृषि सूचना तंत्र को सशक्त बनाने और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित चार दिवसीय “विराट किसान मेला” के तृतीय दिवस पर किसान दिवस का भव्य आयोजन हुआ। ब्लॉक संसाधन केन्द्र, पड़रौना में आयोजित इस कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर ने किया।
जिलाधिकारी ने विभिन्न विभागों एवं एफ.पी.ओ. द्वारा लगाए गए कृषि प्रदर्शनी स्टॉलों का अवलोकन करते हुए किसानों से सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से किसानों को एक ही मंच पर नवीन तकनीक, योजनाएं और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन प्राप्त होता है, जिससे खेती लाभकारी बनती है।
कार्यक्रम में डा० वाई०पी० भारती, वैज्ञानिक, स्व० बाबू गेंदा सिंह गन्ना अनुसंधान संस्थान, सेवरही ने मृदा परीक्षण, बसंतकालीन गन्ना खेती तथा कीट-रोग नियंत्रण की उपयोगी जानकारी दी। वहीं डा० श्रुति बी०, मौसम वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र सरगटिया ने मौसम पूर्वानुमान और साग-सब्जी उत्पादन पर महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।
उप कृषि निदेशक अतीन्द्र सिंह ने “धरती बचाओ अभियान” के तहत संतुलित उर्वरक व कीटनाशक प्रयोग पर जोर देते हुए कहा कि भूमि की उर्वरता बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने फारमर रजिस्ट्री को अनिवार्य बताते हुए चेताया कि इसके अभाव में पीएम किसान सम्मान निधि सहित भविष्य की सभी सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। किसानों को बताया गया कि बसंतकालीन गन्ने के साथ सहफसली खेती हेतु उर्द व मूंग का बीज निःशुल्क मिलेगा, जिसके लिए 31 जनवरी तक टोकन जारी किए जाएंगे।
किसान दिवस में फारमर रजिस्ट्री, गन्ना तौल केन्द्रों पर डिस्प्ले, बोरे की उपलब्धता तथा छुट्टा पशुओं की समस्या से जुड़ी शिकायतें रखी गईं। जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि 10 प्रतिशत केन्द्रों पर डिस्प्ले लगाए जा चुके हैं, शेष पर शीघ्र व्यवस्था होगी।
जिलाधिकारी ने शिकायतों के त्वरित निस्तारण का आश्वासन देते हुए कहा कि फारमर रजिस्ट्री की समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा। उन्होंने छोटे तालाबों को प्राथमिकता देने और प्राचीन कुओं के सर्वे का निर्देश भी दिया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कामेश श्रीवास्तव, परमा यादव व श्रीमती कलावती को 50 प्रतिशत अनुदान पर तिरपाल वितरित की। कार्यक्रम के अंत में जादूगर राजेश श्रीवास्तव ने जादूगरी के माध्यम से कृषि योजनाओं की जानकारी देकर किसानों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मेले में बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानों की सहभागिता ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।





