
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
कुशीनगर सहित देशभर में नशे का जाल तेजी से फैलता जा रहा है और यह अब एक गंभीर सामाजिक संकट का रूप ले चुका है। नशीले पदार्थ—चाहे वह मेडिकल स्टोरों से बिकने वाली दवाएं हों या अवैध रूप से संचालित अन्य दुकानें—बेखौफ तरीके से युवाओं तक पहुंच रहे हैं। परिणामस्वरूप देश की सबसे बड़ी ताकत कही जाने वाली युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में फंसती जा रही है। यह समस्या केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर सीधा हमला है।
आज नशा लगभग हर अपराध की जड़ बन चुका है। घरेलू हिंसा, सड़क दुर्घटनाएं, महिलाओं के साथ अत्याचार, अपहरण और यहां तक कि संगठित अपराधों के पीछे भी नशे की काली परछाई साफ दिखाई देती है। नशा पहले इंसान की जेब खाली करता है, फिर शरीर को खोखला करता है और अंततः उसके चरित्र, विवेक और नैतिकता को नष्ट कर देता है। सबसे भयावह स्थिति यह है कि जिस युवा शक्ति पर देश की प्रगति टिकी है, वही युवा मानसिक संतुलन खोकर अंधेरे की ओर बढ़ रहा है।
अक्सर अभिभावक तब जागते हैं, जब उनका बेटा या बेटी नशे के दलदल में पूरी तरह धंस चुका होता है। उस समय पश्चाताप के अलावा कुछ भी शेष नहीं बचता। सवाल साफ और तीखे हैं—क्या हम अपनी पीढ़ी को यूं ही बर्बाद होते देखते रहेंगे? क्या ज़हर बेचने वालों पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी किसी की नहीं? क्या कानून और समाज की भूमिका केवल तमाशबीन बनने तक सीमित रह गई है?
अब समय चेतना का नहीं, निर्णायक कार्रवाई का है। नशे के खिलाफ सख्त और निरंतर अभियान, नशीले पदार्थों की बिक्री पर कड़ा नियंत्रण, मेडिकल स्टोरों और अवैध दुकानों की नियमित जांच, तथा दोषियों पर कठोर दंड अनिवार्य हो गया है। इसके साथ ही समाज, अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों और युवाओं की सामूहिक भागीदारी के बिना इस विनाशकारी प्रवृत्ति पर रोक संभव नहीं है।
यदि आज ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कल बहुत देर हो जाएगी। आइए, अपने बच्चों, अपने समाज और अपने देश के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लें। यही समय की सबसे बड़ी मांग है।
