
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
दिनांक: 10 अप्रैल 2026
कुशीनगर के रामकोला थाना क्षेत्र में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक सनसनीखेज घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। सोती हुई युवती पर तेजाब फेंककर उसे मौत के घाट उतार देना—यह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि समाज के मुंह पर करारा तमाचा है।
मोरवन टोला इमलिया की रहने वाली 25 वर्षीय काजल यादव और उसकी माँ लीलावती पर तड़के करीब 3:30 बजे दो दरिंदों ने ज्वलनशील पदार्थ उड़ेल दिया। नींद में डूबी जिंदगी कुछ ही सेकंड में आग के हवाले हो गई। गंभीर रूप से झुलसी दोनों को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन काजल जिंदगी की जंग हार गई—और पीछे छोड़ गई सवालों का अंबार।
पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए 10 घंटे के भीतर इस खौफनाक वारदात का खुलासा कर दिया और दो आरोपियों—छोटेलाल खरवार और अनुज कुशवाहा—को दबोच लिया। पूछताछ में जो कहानी सामने आई, वह और भी सिहराने वाली है। एकतरफा प्रेम, ठुकराया गया अहंकार और फिर बदले की आग—जिसने एक बेटी की जिंदगी निगल ली।
बताया गया कि आरोपी छोटेलाल युवती के इनकार से बौखला गया था, क्योंकि उसकी शादी कहीं और तय हो चुकी थी। प्यार के नाम पर जुनून और फिर जुनून के नाम पर हत्या—क्या यही समाज की नई सच्चाई बनती जा रही है?
तेजाब बिहार के गोपालगंज से लाया गया—यानि साजिश पहले से रची गई थी। सवाल यह है कि आखिर इतनी आसानी से तेजाब कैसे उपलब्ध हो गया? प्रशासन की सख्ती सिर्फ कागजों तक सीमित है क्या?
पुलिस भले ही अपनी पीठ थपथपा रही हो कि खुलासा 10 घंटे में कर दिया, लेकिन असली सवाल यह है—क्या ऐसी घटनाओं को होने से पहले रोका जा सकता था? क्या सिस्टम सिर्फ घटना के बाद जागेगा?
यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था, सामाजिक सोच और प्रशासनिक ढांचे पर बड़ा सवालिया निशान है। आखिर कब तक बेटियां इस तरह जलती रहेंगी और जिम्मेदार सिर्फ “कार्रवाई जारी है” का राग अलापते रहेंगे?
