


विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद की तमकुहीराज तहसील अंतर्गत नगर पंचायत सेवरही क्षेत्र में गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी के नाम पर उपभोक्ताओं से कथित रूप से की जा रही अवैध वसूली का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। उपभोक्ताओं की शिकायत पर सप्लाई इंस्पेक्टर राजीव श्रीवास्तव को दिए गए लिखित प्रार्थना पत्र के बाद बुधवार को उन्होंने स्नेहा इंडेन गैस सर्विस, सेवरही पहुंचकर मामले की जांच की।
सूचना मिलते ही अम्बेडकर नगर वार्ड के सभासद पप्पू जायसवाल भी एजेंसी कार्यालय पहुंच गए और सप्लाई इंस्पेक्टर के सामने उपभोक्ताओं से हो रही अतिरिक्त वसूली का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। सभासद ने सीधा सवाल दागते हुए पूछा कि जब भारत सरकार द्वारा गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी का निर्धारित मूल्य 985 रुपये तय है, तो फिर उपभोक्ताओं से 25 से 50 रुपये अतिरिक्त किस आधार पर वसूले जा रहे हैं।
इस सवाल पर सप्लाई इंस्पेक्टर राजीव श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि होम डिलीवरी के लिए हाकरों को 33 रुपये का कमीशन पहले से ही निर्धारित है और यह राशि सिलेंडर की कीमत में शामिल रहती है। यानी उपभोक्ता से अलग से कोई अतिरिक्त पैसा लेने का प्रावधान ही नहीं है।
यहीं से सवाल और भी तीखा हो गया—जब डिलीवरी का शुल्क पहले से ही गैस के दाम में शामिल है, तो आखिर यह ‘अतिरिक्त वसूली’ किस नियम के तहत की जा रही है? मौके पर मौजूद लोगों ने भी इस पर नाराजगी जाहिर की। इसके बाद सप्लाई इंस्पेक्टर ने एजेंसी कर्मचारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित रेट को गाड़ी पर स्पष्ट रूप से लिखकर प्रचारित किया जाए और हाकर केवल निर्धारित मूल्य ही लें।
बताया जा रहा है कि स्नेहा इंडेन गैस सर्विस सेवरही जिले की सबसे बड़ी गैस एजेंसियों में से एक है, जहां करीब 20 हजार उपभोक्ताओं के कनेक्शन हैं। सभासद पप्पू जायसवाल का कहना है कि यदि हर सिलेंडर पर 25 से 50 रुपये अतिरिक्त लिए जा रहे हैं, तो यह रकम हर महीने लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। उनके अनुसार यह आंकड़ा लगभग 6 लाख रुपये की संभावित अवैध वसूली की ओर इशारा करता है।
फिलहाल कई उपभोक्ताओं ने इस मामले में लिखित शिकायत भी दी है। सप्लाई इंस्पेक्टर राजीव श्रीवास्तव ने भरोसा दिलाया कि मामले की गंभीरता से जांच कर जल्द ही आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद इस ‘होम डिलीवरी वसूली मॉडल’ पर वास्तव में लगाम लगती है या मामला फिर फाइलों में ही सिमट कर रह जाता है।



