
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर — विशेष रिपोर्ट
कुशीनगर। जिले में गेहूं के बीज को लेकर खुलेआम चल रहा ओवर रेटिंग का खेल किसानों की कमर तोड़ रहा है। सरकारी दर 936 रुपये तय होने के बावजूद किसानों को मजबूरन 1050 रुपये में बीज खरीदना पड़ रहा है। फर्क सिर्फ 10–20 रुपये का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर किसानों पर लूट का पहाड़ टूट रहा है, और हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा है।
विशुनपुरा ब्लॉक के सरकारी बीज गोदाम में यह खुला खेल reportedly जारी है। किसानों की आय दोगुनी करने का सपना दिखाने वाले अधिकारी खुद ही उस सपने में छेद कर रहे हैं। किसानों ने बताया कि जब वे सही दाम पर बीज मांगते हैं, तो उनकी अनदेखी कर दी जाती है और उन्हें कहा जाता है— “लेना हो तो लो, नहीं तो वापस जाओ।” ऐसे में गरीब किसान मजबूर होकर अतिरिक्त पैसा देकर बीज खरीदने को विवश हैं।
स्थानीय किसानों का आरोप है कि यह कोई नया मामला नहीं, बल्कि हर साल यह ओवर रेटिंग का रैकेट सक्रिय रहता है। सरकारी कीमतों की धज्जियां उड़ाते हुए बीज को मनमाने दामों पर बेचकर कुछ लोग मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। किसानों के हक का बीज, किसानों के भविष्य का बीज—सब पर लालच का ताला जड़ दिया गया है।
जब इस विषय पर जिला कृषि अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही, लेकिन किसानों का कहना है कि सिर्फ जांच की घोषणा से अब भरोसा नहीं बनता।
किसानों की मांग है कि प्रशासन मौके पर जाकर तुरंत कार्रवाई करे और ओवर रेटिंग में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि उन्हें उनका हक मिल सके।
कुल मिलाकर कुशीनगर में बीज वितरण व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—
क्या किसान यूँ ही लूटते रहेंगे, और अधिकारी आँखें मूंदे बैठे रहेंगे?
