
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित कर लोगों ने सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना
कुशीनगर। सूर्यदेव के उत्तरायण होते ही जैसे अंधकार ने आत्मसमर्पण कर दिया और उजास ने उत्सव का सिंहासन संभाल लिया। सूर्य उपासना और ऋतु परिवर्तन के पावन संदेश के साथ मकर संक्रांति के महापर्व पर पूरा जनपद आस्था, परंपरा और उल्लास के महासागर में डूबा नजर आया। भोर की शंखध्वनि, नदियों में आस्था की डुबकी, तिल–गुड़ की मिठास और आसमान में इठलाती रंग-बिरंगी पतंगें भारतीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश कर रही थीं। स्नान–दान के उपरांत श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित कर सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना की।
घर–घर में पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू फैलती रही। तिल–गुड़, चूड़ा–दही, खिचड़ी और लाई जैसे पकवानों ने पर्व की रौनक बढ़ा दी। मान्यता के अनुसार तिल और गुड़ का सेवन आपसी कटुता को मिटाकर रिश्तों में मधुरता घोलता है। इसी भाव के साथ लोगों ने एक-दूसरे को प्रसाद भेंट कर शुभकामनाएं दीं। मंदिरों में विशेष पूजा–अर्चना, हवन और भंडारों का आयोजन हुआ, जहां सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। ग्रामीण अंचलों में पर्व मेले का रूप लेता दिखा। बच्चे, युवा और बुजुर्ग पतंगबाजी में मग्न रहे। रंगीन पतंगों से सजा आसमान और उत्साह से गूंजती टोलियां उल्लास का सजीव चित्र प्रस्तुत कर रही थीं।
इस अवसर पर सामाजिक सरोकार भी प्रमुखता से उभरे। विभिन्न सामाजिक संगठनों व स्वयंसेवी संस्थाओं ने जरूरतमंदों के बीच खिचड़ी, फल, मिठाई और गर्म वस्त्रों का वितरण किया। कहीं सामूहिक भोज तो कहीं सेवा कार्यों के माध्यम से मानवता और भाईचारे का संदेश दिया गया।

🔴 जरूरतमंदों में संयोग ने किया कंबल वितरण
ठिठुरन और हाड़ कंपा देने वाली ठंड को देखते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं एडवोकेट संयोग श्रीवास्तव ने अपने पैतृक गांव तरया लच्छीराम में गरीब एवं असहाय लोगों के बीच कंबल वितरण किया। उन्होंने कहा कि समाज में एक ओर जहां संपन्नता बढ़ रही है, वहीं गरीब और असहायों की संख्या भी चिंताजनक रूप से बढ़ रही है। ऐसे में प्रत्येक सक्षम व्यक्ति का दायित्व है कि वह अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की मदद करे। यही मानवता की सच्ची सेवा है और यही सामाजिक सौहार्द का आधार।
उन्होंने बताया कि यह सेवा-कार्य कोरोना काल में शुरू हुआ था, जो भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से निरंतर जारी है और जीवनपर्यंत चलता रहेगा। कार्यक्रम में ज्योतिषाचार्य अशोक मणि त्रिपाठी, राकेश श्रीवास्तव, ओम्, अवध खरवार, मोहन, रामू गोड, ऋषि, यशराज सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। मकर संक्रांति का यह पर्व जनपद में केवल उत्सव नहीं, बल्कि सेवा, समरसता और संस्कार का संदेश बनकर उभरा।

