
जनता की समस्याओं पर अब नहीं चलेगा बहाना—थानों में बजेगी जवाबदेही की घंटी
जनवरी–मार्च 2026 तक समाधान दिवसों का रोस्टर जारी, लेकिन बड़ा सवाल: आदेश का असर दफ्तरों तक या धरातल तक?
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर की सख्त और सीधी रिपोर्ट
25 दिसंबर, विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर।
जनपद कुशीनगर प्रशासन ने आगामी तीन महीनों के लिए थाना/समाधान दिवसों का रोस्टर जारी कर दिया है, और दावे वही पुराने—“समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण।” लेकिन इस बार प्रशासनिक शब्दों में एक तेवर भी दिख रहा है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने साफ कहा—“हर शिकायत दर्ज होगी, हर अधिकारी मौजूद रहेगा और समाधान टलेगा नहीं।” कागज़ों पर यह इरादा कड़क है, पर धरातल पर कितने डंडे पड़ेंगे, ये जनता की निगाह में सबसे बड़ा सवाल है।
रोस्टर के अनुसार जनवरी 2026 से मार्च 2026 तक, द्वितीय और चतुर्थ शनिवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक, सभी थानों में थाना समाधान दिवस आयोजित किए जाएंगे। राजस्व, पुलिस, विकास, विद्युत, नगर निकाय समेत तमाम विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों की अनिवार्य मौजूदगी सुनिश्चित की गई है। यानी—कुर्सी पर बैठते ही बहाना खत्म, और अनुपस्थिति पर सीधी जवाबदेही।
प्रत्येक शिकायत की सुनवाई जिम्मेदार प्रभारी अधिकारियों द्वारा मौके पर ही की जाएगी। जहाँ संभव हो, वहीं समाधान; जहाँ कठिनाई हो, “आवश्यक निर्देश”—यानी इस बार शिकायतें फाइलों में घूमने के बजाय रजिस्टर और जीडी में दर्ज होकर चेकिंग के दायरे में रहेंगी। जिलाधिकारी का निर्देश साफ—“हर शिकायत दर्ज करो, वरना खुद दर्ज हो जाओगे।”
गंभीर मामलों में पुलिस-राजस्व की संयुक्त टीम को मौके पर जाकर तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। जिन मामलों का निपटारा थाना समाधान दिवस में न हो, वे सीधे तहसील दिवस में पहुंचाए जाएंगे—मतलब, गेंद उछली तो भी कहीं गिरनी है, हवा में लटकने का खेल बंद।
सबसे नुकीला आदेश—“जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक या उनके वरिष्ठ अधिकारी कभी भी थानों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगे।” यह पंक्ति कागज़ पर साधारण दिखती है, लेकिन फील्ड में बैठे सुस्त चेहरों के लिए चेतावनी की घंटी है। क्योंकि निरीक्षण का मतलब अगर सिर्फ फोटो-ऑप रहा तो जनता समझ लेगी—और अगर सख्ती रही, तो विभाग समझ जाएंगे।
विलेज फास्ट टाइम्स की प्रतिक्रिया — कड़वी पर सच्ची
कुशीनगर की जनता आदेशों से नहीं, नतीजों से खुश होती है। समाधान दिवस पहले भी हुए—जनता आई, फाइलें चलीं, और शिकायतें फिर अगली बार की सूची में पहुंचीं। इस बार उम्मीद इसलिए जगी है क्योंकि जवाबदेही की बात सीधे जुबान पर आई है। लेकिन हमारा प्रश्न वही, जो जनता के मन में भी गूंजता है—
“क्या आदेश सिर्फ सुनाई देगा, या असर भी करेगा?”
“क्या अधिकारी कुर्सी संभालेंगे या सिर्फ कुर्सी बचाएँगे?”
“क्या शिकायत लिखी जाएगी या लिखवाने के लिए भी दौड़ लगानी पड़ेगी?”
आखिरकार—
जनता समाधान चाहती है, आश्वासन नहीं।
प्रशासन निर्देश देता है, पर असर तब होता है जब निष्पादन ईमानदार हो।
जनवरी से मार्च तक हर समाधान दिवस पर
विलेज फास्ट टाइम्स निगरानी करेगा, न सिर्फ खबर लिखेगा।
फैसला जनता देगी—“आदेश कड़क था या सिर्फ कागज़ का।”
