
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता
चित्रगुप्त मंदिर परिसर बना विवाद का केंद्र, समिति का तीखा आरोप—“सुनियोजित साजिश, बर्दाश्त नहीं”
कुशीनगर जनपद के पडरौना नगर स्थित श्री चित्रगुप्त मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है—लेकिन इस बार वजह श्रद्धा नहीं, बल्कि कथित साजिश और टकराव है। 9 अप्रैल को मंदिर समिति द्वारा लगाए गए प्रशासनिक/कैंप कार्यालय और भगवान श्री चित्रगुप्त के फ्लैश बोर्ड को असामाजिक तत्वों द्वारा फाड़े जाने का मामला सामने आते ही पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई है।

मामले को और गंभीर तब बना दिया, जब इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सामने आया। वीडियो में साफ तौर पर एक व्यक्ति को फ्लैश बोर्ड क्षतिग्रस्त करते हुए देखा जा रहा है। मंदिर समिति ने बिना लाग-लपेट के आरोप लगाते हुए कहा कि यह कोई मामूली शरारत नहीं, बल्कि “आस्था पर सीधा हमला” और “सोची-समझी साजिश” है।
समिति के अध्यक्ष और पूर्व चेयरमैन नरेन्द्र वर्मा ने तीखे शब्दों में कहा कि विधिवत स्थापित किए गए बोर्ड को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि कुछ लोगों को मंदिर के विकास से तकलीफ है। उनका दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक एनजीओ से जुड़े संरक्षक प्रकाश श्रीवास्तव का हाथ है, जिनके कथित उकसावे पर गायत्री परिवार से जुड़े अतुल श्रीवास्तव ने यह कृत्य किया।
“वीडियो खुद गवाही दे रहा है, अब सफाई का कोई मतलब नहीं,”—समिति के एक सदस्य ने कटाक्ष करते हुए कहा।
मामला यहीं नहीं रुकता। असली विवाद उस भूमि को लेकर बताया जा रहा है, जहां पहले ही शिवलिंग स्थापना के लिए विधिवत भूमि पूजन किया जा चुका है। इसके बावजूद आरोप है कि कुछ लोग उसी जमीन पर विधायक निधि से कॉम्प्लेक्स और अन्य निर्माण कराने की फिराक में हैं। सवाल उठता है—क्या विकास के नाम पर आस्था की जमीन पर कब्जे का खेल खेला जा रहा है?
समिति का कहना है कि मंदिर की पवित्र भूमि को “कमाई का जरिया” बनाने की कोशिशें हो रही हैं। “जब आस्था बिकने लगे और मंदिर राजनीति का अड्डा बनने लगे, तो समझ लीजिए कि असली खतरा बाहर से नहीं, भीतर से है,”—एक वरिष्ठ सदस्य ने तंज कसते हुए कहा।
घटना के बाद मंदिर समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि ऐसे कृत्य करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने इसे धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश करार देते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही, समिति ने पडरौना नगर सहित पूरे जिले के सनातनी समाज और सर्वसमाज से अपील की है कि वे ऐसे “स्वार्थी चेहरों” को पहचानें, जो निजी फायदे के लिए मंदिर की जमीन पर गिद्ध नजर गड़ाए बैठे हैं।
चेतावनी भी साफ है—“यदि जरूरत पड़ी, तो लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।”
अब देखना यह है कि यह मामला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है। लेकिन एक बात तय है—चित्रगुप्त मंदिर का यह विवाद अब केवल एक बोर्ड तक सीमित नहीं रहा, यह आस्था बनाम स्वार्थ की जंग बन चुका है, जिसमें सच और साजिश के बीच की रेखा हर गुजरते दिन के साथ और गहरी होती जा रही है।
