


विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के खड्डा तहसील से एक सनसनीखेज़ मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक तंत्र की डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खड्डा के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) रामवीर सिंह के डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर सरकारी सिस्टम से खुलेआम खेल खेलने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर पर आखिरकार कानून का डंडा चल ही गया। एसडीएम के स्पष्ट आदेश पर संविदा कर्मी अरविंद रावत के खिलाफ संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर धान खरीद के लिए किसानों के ऑनलाइन आवेदन में बड़े पैमाने पर हेराफेरी करता था। एसडीएम के डिजिटल सिग्नेचर का अनधिकृत इस्तेमाल कर वह ऐसे आवेदनों को स्वीकृत करता रहा, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं था। यानी सरकारी मुहर का सहारा लेकर सिस्टम में सेंधमारी और किसानों के हक़ पर डाका—वह भी अंदर बैठकर।
मामले की परतें खुलने पर यह भी सामने आया कि अरविंद रावत सिर्फ धान खरीद तक ही सीमित नहीं था, बल्कि अन्य सरकारी दस्तावेजों में भी गंभीर अनियमितताएं करता रहा। डिजिटल दस्तख़त जैसे संवेदनशील औज़ार को निजी हथियार बनाकर सरकारी प्रक्रिया को अपने हिसाब से मोड़ना, यह न सिर्फ अपराध है बल्कि प्रशासनिक भरोसे के साथ खुला खिलवाड़ भी है।
एसडीएम खड्डा रामवीर सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है—डिजिटल सिस्टम में घुसपैठ और सरकारी अधिकारों के दुरुपयोग पर ज़ीरो टॉलरेंस। सूत्रों की मानें तो मामले की विस्तृत जांच जारी है और आगे और भी नाम सामने आ सकते हैं।
इस कार्रवाई के बाद तहसील परिसर से लेकर जनपद मुख्यालय तक हलचल तेज़ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि एक संविदा कर्मी को डिजिटल हस्ताक्षर तक पहुंच कैसे मिली? क्या निगरानी तंत्र सो रहा था, या आंखें मूंदकर सब कुछ चलने दिया जा रहा था?
फिलहाल, एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह मामला सिस्टम को आईना दिखाने के लिए काफी है। अब देखना यह होगा कि जांच सिर्फ कागज़ों तक सिमटती है या सच में दोषियों तक पहुंचकर मिसाल कायम करती है।
विलेज फास्ट टाइम्स इस पूरे प्रकरण पर पैनी नज़र बनाए हुए है।
