

विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
सोहगीबरवा क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। मदरसा टोला, सोहगीबरवा निवासी 14 वर्षीय गुड्डी उर्फ लाची चौधरी (पुत्री उमेश चौधरी) की बाघ के हमले में दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि किशोरी जंगल की ओर लकड़ी बीनने गई थी, तभी झाड़ियों से निकले बाघ ने उस पर अचानक हमला कर दिया। जब तक आसपास के लोग कुछ समझ पाते, बाघ उसे घसीटते हुए जंगल की ओर ले गया। कुछ ही देर में मासूम की लाश बरामद हुई, जिससे पूरे गांव में कोहराम मच गया।
घटना के बाद से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश और भय व्याप्त है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते कई दिनों से क्षेत्र में बाघ की गतिविधियां लगातार देखी जा रही थीं, लेकिन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए। लोगों का आरोप है कि वन विभाग की लापरवाही के चलते एक मासूम की जान चली गई। गांव में मातम पसरा है और हर परिवार अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल उचित मुआवजा देने, स्थायी राहत पैकेज घोषित करने और क्षेत्र में प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब तक बाघ की मूवमेंट पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं किया जाता, तब तक जंगल से सटे गांवों में खतरा बना रहेगा। ग्रामीणों ने पिंजरा लगाने, सघन गश्त, सायरन व्यवस्था और रात्रि निगरानी बढ़ाने की मांग उठाई है।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने क्षेत्र का निरीक्षण कर बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। वन विभाग ने इलाके में ट्रैप कैमरे लगाने, गश्त बढ़ाने और ग्रामीणों को जंगल की ओर अकेले न जाने की सलाह जारी की है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।
यह हादसा प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को हल्के में नहीं लिया जा सकता। यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे दर्दनाक हादसे दोहराए जाने से इंकार नहीं किया जा सकता। अब सवाल यह है कि क्या मासूम की मौत के बाद व्यवस्था जागेगी, या फिर ग्रामीण यूं ही खतरे के साए में जीने को मजबूर रहेंगे?

