
20 दिसम्बर, विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और त्वरित समाधान के उद्देश्य से खड्डा तहसील सभागार में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस इस बार प्रशासन की सख़्ती और सक्रियता का स्पष्ट संदेश लेकर सामने आया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने की, जबकि पुलिस अधीक्षक केशव कुमार की गरिमामयी उपस्थिति ने कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों को और अधिक मजबूती प्रदान की।
समाधान दिवस के दौरान विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 94 शिकायती प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 11 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर यह साबित किया गया कि प्रशासन अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समाधान पर विश्वास करता है। शेष 83 मामलों को जिलाधिकारी ने समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के स्पष्ट निर्देशों के साथ संबंधित विभागों को सौंपा।
विभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो राजस्व विभाग से सर्वाधिक 38 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 6 मामलों का तत्काल निस्तारण किया गया। पुलिस विभाग से 16, पुलिस एवं राजस्व के संयुक्त 7 तथा विकास विभाग से 9 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें मौके पर निस्तारण संभव न होने पर अधिकारियों को कठोर समय-सीमा में समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अन्य विभागों से प्राप्त 24 शिकायतों में से 5 का मौके पर समाधान कर प्रशासन की तत्परता दिखाई गई।
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने शीतलहर से प्रभावित गरीब व असहाय लोगों के बीच कंबल वितरण कर मानवीय संवेदना का परिचय दिया। बढ़ती ठंड को देखते हुए जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि अलाव, रैन बसेरे एवं अन्य राहत व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण कर किसी भी प्रकार की लापरवाही न होने दें।
इसके साथ ही जिलाधिकारी ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि नगर क्षेत्र से लेकर ग्राम सभाओं तक सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी अधिकारियों को सरकारी भूमि की अद्यतन रिपोर्ट शीघ्र तैयार कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
सम्पूर्ण समाधान दिवस में परियोजना निदेशक पीयूष, जिला विकास अधिकारी अरुण कुमार पांडेय, डीसी मनरेगा राकेश, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राम जियावन मौर्य, जिला कृषि अधिकारी डॉ. मेनका सहित समस्त जनपद एवं तहसील स्तरीय अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
कुल मिलाकर, यह समाधान दिवस केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता को राहत और प्रशासन को जवाबदेह बनाने की ठोस पहल के रूप में सामने आया।





