
कुशीनगर।
जिला 153 कुशीनगर के दुदही ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत कुबेरा भुआलपट्टी में जारी मतदाता सूची 2025 ने एक बार फिर लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड संख्या 10, मतदान स्थल संख्या 165, मकान नंबर 94 में निवास करने वाली महिला मतदाता का नाम सूची से हटाया जाना केवल एक प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि मताधिकार पर सीधा और करारा हमला माना जा रहा है। इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय जनता को आक्रोशित किया है, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार संबंधित महिला वर्षों से उसी पते पर रह रही है और पूर्व में कई बार अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुकी है। इसके बावजूद बिना समुचित सत्यापन, बिना पूर्व सूचना और बिना आपत्ति का अवसर दिए BLO द्वारा नाम काट दिया जाना घोर लापरवाही और मनमानी का प्रतीक है। सवाल यह उठता है कि क्या मतदाता सूची का पुनरीक्षण अब कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है? या फिर BLO स्तर पर लापरवाही को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
निर्वाचक नामावली के अंतिम प्रकाशन के बाद जिला प्रशासन भले ही औपचारिक संतोष व्यक्त कर रहा हो, लेकिन कुबेरा भुआलपट्टी की जमीनी हकीकत इन दावों की हवा निकाल रही है। एक-एक नाम कटने का मतलब लोकतंत्र की नींव को कमजोर करना है, जिसे प्रशासन हल्के में लेता नजर आ रहा है। जिम्मेदारी तय करने और दोषी BLO पर कार्रवाई करने के बजाय केवल “भरोसा बनाए रखने” की अपील करना अब महज़ बयानबाज़ी लग रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि आज एक महिला का नाम बिना कारण काटा जा सकता है, तो कल किसी और का भी कट सकता है। यह सिलसिला थमा नहीं तो आने वाले चुनावों में मतदान प्रतिशत और जनविश्वास दोनों पर गहरा असर पड़ेगा। मतदाता सूची में इस तरह की गड़बड़ियां लोकतंत्र के लिए धीमा ज़हर साबित हो सकती हैं।
अब जनता की मांग है कि जिला निर्वाचन अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कराएं, दोषी BLO की जिम्मेदारी तय हो और पीड़ित महिला सहित अन्य संभावित मतदाताओं के नाम तत्काल बहाल किए जाएं। अन्यथा मतदाता सूची 2025 को सुधार की प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र को चोट पहुंचाने वाला दस्तावेज माना जाएगा।
