
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के रामकोला थाना क्षेत्र अंतर्गत अमडरिया गांव से सामने आई यह तस्वीर न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मिशन शक्ति जैसे अभियानों की ज़मीनी हकीकत को भी कठघरे में खड़ा कर देती है।
यहां 27 वर्षीय पीड़ित महिला रेखा पिछले तीन दिनों से भूखी-प्यासी अपने ही पति के दरवाजे पर बैठी है — सिर्फ़ इस उम्मीद में कि उसे अपने ससुराल में रहने का अधिकार मिल जाए।
रेखा की शादी को अभी महज़ 25 दिन ही हुए थे कि ससुराल पक्ष के लोगों ने कथित रूप से उसे प्रताड़ित कर मायके भेज दिया। पीड़िता का आरोप है कि जब वह न्याय की गुहार लेकर थाना पहुंची, तो वहां भी उसकी सुनवाई नहीं हुई। न कोई कार्रवाई, न कोई ठोस आश्वासन। नतीजा यह कि आज वह महिला खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठने को मजबूर है।
तीन दिन…
न पानी,
न भोजन,
न प्रशासन का संज्ञान।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एक विवाहित महिला का अपने ससुराल में रहने का अधिकार भी अब धरना मांगता है?
क्या थाना केवल शिकायत दर्ज करने की इमारत बनकर रह गया है?
और क्या मिशन शक्ति सिर्फ पोस्टर, बैनर और भाषणों तक सीमित होकर रह गया है?
पीड़िता रेखा की हालत देखकर गांव के लोग भी हैरान हैं। महिला की तबीयत बिगड़ने की आशंका बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक अमला अब तक मौके पर नहीं पहुंचा। न महिला अधिकारी आईं, न ही कोई सामाजिक सुरक्षा तंत्र सक्रिय हुआ।
यह मामला सिर्फ एक महिला का नहीं है, यह उस व्यवस्था का आईना है जो महिला सशक्तिकरण की बात तो करती है, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर आंखें फेर लेती है।
अगर यही हाल रहा तो सवाल उठना लाज़मी है —
क्या न्याय भी अब भूख हड़ताल के बाद ही मिलेगा?
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर प्रशासन से मांग करता है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप, पीड़िता की सुरक्षा, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
वरना यह धरना सिर्फ रेखा की पीड़ा नहीं, बल्कि सिस्टम की असफलता का स्थायी दस्तावेज बन जाएगा।

