
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। उम्र महज 16 वर्ष, लेकिन नजरिया पूरे शहर के विद्यार्थियों के भविष्य पर! कक्षा 11 की छात्रा रागिनी राज्यलक्ष्मी सिंह ने यह साबित कर दिया कि बदलाव की शुरुआत करने के लिए उम्र नहीं, बल्कि मजबूत सोच और पहल करने का साहस जरूरी है। पडरौना में आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित कराने की मांग उठाकर उन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई, तकनीकी ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा जिला प्रशासन के सामने रखा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विद्यार्थियों की यह पहल धरातल पर कब उतरती है।
सोमवार को रागिनी राज्यलक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में तीन यूथ क्लबों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी संजय चौहान से उनके कैंप कार्यालय में मुलाकात की। इस दौरान विद्यार्थियों ने पडरौना नगर में एक ऐसी कॉमन डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करने की मांग रखी, जहां किताबों के साथ आधुनिक तकनीक, इंटरनेट और ऑनलाइन शिक्षा की सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हों। जिलाधिकारी ने छात्र-छात्राओं की पहल की सराहना करते हुए मांग को स्वीकार किया।
किताबों से आगे बढ़कर डिजिटल शिक्षा की जरूरत
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि आज शिक्षा का दायरा तेजी से बदल रहा है। विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों के साथ इंटरनेट आधारित अध्ययन सामग्री, तकनीकी ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण संसाधनों की जरूरत है। आर्थिक कठिनाइयों के कारण हर विद्यार्थी महंगे उपकरण और ऑनलाइन अध्ययन की सुविधाएं नहीं जुटा पाता। ऐसे में सार्वजनिक डिजिटल लाइब्रेरी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
ज्ञापन में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और आधुनिक तकनीक से संबंधित पुस्तकों, रेफरेंस बुक्स, वाई-फाई युक्त कंप्यूटर तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क ऑनलाइन तैयारी की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया। लाइब्रेरी में विद्यार्थियों के उपयोग के लिए मोबाइल और टैबलेट उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई, ताकि संसाधनों की कमी किसी की पढ़ाई में बाधा न बने।
छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा पर भी जोर
डिजिटल लाइब्रेरी की मांग केवल तकनीकी सुविधाओं तक सीमित नहीं रही। प्रतिनिधिमंडल ने छात्राओं के लिए अलग आरक्षित समय निर्धारित करने का सुझाव भी दिया। इसका उद्देश्य छात्राओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और पढ़ाई के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है, जिससे वे बिना किसी असुविधा के अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
तीन कॉलेजों के यूथ क्लबों की सामूहिक पहल
रागिनी राज्यलक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में यूथ क्लब हनुमान इंटर कॉलेज, उदित नारायण इंटरमीडिएट कॉलेज और स्यो बाई कमला देवी टिबड़ेवाल इंटर कॉलेज में सक्रिय हैं। इन क्लबों में विद्यार्थी अपनी समस्याओं और भविष्य की जरूरतों पर चर्चा करते हैं। डिजिटल लाइब्रेरी की मांग भी इसी सामूहिक विचार-विमर्श का परिणाम है।
प्रतिनिधिमंडल में श्रेया जायसवाल, मांडवी सिंह, सोनम केसरी, आराधना सिंह, अंशिका वर्मा, रत्ना कुशवाहा, अदिति पांडेय और राबिया तबस्सुम सहित अन्य छात्राएं शामिल रहीं।
मांग स्वीकार, अब अमल का इंतजार
जिलाधिकारी संजय चौहान ने यूथ क्लबों की पहल को सकारात्मक बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास युवाओं में सामाजिक जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच विकसित करते हैं। हालांकि, डिजिटल लाइब्रेरी की वास्तविक सफलता अब स्थान चयन, बजट आवंटन, उपकरणों की उपलब्धता और संचालन की व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण कदमों पर निर्भर करेगी।
अब सवाल यह है कि पडरौना के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा का साझा मंच कितनी जल्दी मिलेगा? यदि प्रस्तावित लाइब्रेरी स्थापित होती है, तो यह केवल किताबें पढ़ने की जगह नहीं, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, तकनीकी ज्ञान और युवाओं के बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बन सकती है। 16 वर्षीय रागिनी की आवाज ने मुद्दा उठा दिया है, अब प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई की उम्मीद है।
