
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। विशुनपुरा थाना क्षेत्र का एक पारिवारिक विवाद अब प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता नजर आ रहा है। आरोप है कि एक दंपति अपनी डेढ़ वर्ष की मासूम बच्ची के साथ पिछले लगभग एक सप्ताह से घर के बाहर खुले आसमान के नीचे रहने को विवश है। बरसात और उमस के बीच परिवार का घर के बाहर बैठा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है।
पीड़िता ने ऑनलाइन आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से पुलिस अधीक्षक से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि करीब चार वर्ष पूर्व हुई कोर्ट मैरिज के बाद से ही आर्थिक कारणों को लेकर ससुराल पक्ष लगातार प्रताड़ित करता रहा। शिकायत के अनुसार, आए दिन गाली-गलौज और मारपीट की घटनाएं होती रहीं और अंततः 1 जुलाई 2026 को उसे तथा उसके पति को घर से बाहर निकाल दिया गया।
शिकायत में कहा गया है कि अगले दिन डायल-112 की सहायता से दोनों दोबारा घर पहुंचे, लेकिन उसी रात पति के साथ कथित रूप से मारपीट की गई और छत से धक्का दे दिया गया। गंभीर रूप से घायल युवक को पहले सीएचसी दुदही और बाद में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ।
पीड़िता का आरोप है कि निष्पक्ष कार्रवाई के बजाय उसके पति का ही शांति भंग में चालान कर दिया गया, जबकि मारपीट करने वालों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। जमानत के बाद लौटने पर भी कथित रूप से घर में ताला लगाकर उन्हें प्रवेश नहीं करने दिया गया। परिणामस्वरूप दंपति अपनी मासूम बच्ची के साथ घर के बाहर रहने को मजबूर है।
इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यदि किसी परिवार को अपने ही घर के बाहर रातें गुजारनी पड़ें, तो यह केवल पारिवारिक विवाद नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं और प्रशासनिक हस्तक्षेप की कसौटी भी बन जाता है। हालांकि मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
उधर, विशुनपुरा थाना प्रभारी निरीक्षक शनि कुमार जावला ने बताया कि मामला पिता-पुत्र के बीच संपत्ति विवाद से संबंधित है। शांति भंग की कार्रवाई की जा चुकी है तथा छत से धक्का देकर घायल किए जाने के आरोपों की जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस और जिला प्रशासन इस संवेदनशील प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित परिवार को राहत दिलाते हैं या नहीं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई होना न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए भी आवश्यक होगा।



