
निर्वाचित अध्यक्ष के पति राकेश जायसवाल की तस्वीर ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ के बैनर में दिखने का दावा, नगर पालिका से पूछा गया—किस पद और किस आदेश के तहत मिली जगह?
कुशीनगर। नगर पालिका परिषद कुशीनगर में अध्यक्ष के पति राकेश जायसवाल की भूमिका को लेकर उठते सवालों का सिलसिला अब सरकारी प्रचार सामग्री तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ कार्यक्रम से जुड़े बताए जा रहे एक बैनर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नगर विकास मंत्री और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ राकेश जायसवाल की तस्वीर दिखाई देने का मामला सामने आया है। तस्वीर को लेकर अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि फोटो क्यों लगाई गई, बल्कि सवाल यह है कि सरकारी कार्यक्रम के आधिकारिक बैनर पर तस्वीर लगाने का प्रशासनिक और वैधानिक आधार क्या था?
एक तस्वीर, कई सवाल—पालिका प्रशासन जवाब देगा?
यदि बैनर नगर पालिका परिषद का आधिकारिक प्रचार माध्यम है, तो उसमें किसी व्यक्ति की तस्वीर शामिल किए जाने का आधार स्पष्ट होना चाहिए। ऐसे में नगर पालिका प्रशासन से सीधा सवाल है—राकेश जायसवाल का नगर पालिका में कौन-सा वैधानिक पद है? क्या वे निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं? क्या उन्हें किसी सरकारी आदेश से अधिकृत प्रतिनिधि बनाया गया है? या फिर केवल अध्यक्ष के पति होने के कारण उनकी तस्वीर सरकारी प्रचार सामग्री में शामिल की गई?
मामले में यदि कोई लिखित आदेश, कार्यालय आदेश अथवा अधिकृत पदनाम मौजूद है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि तस्वीर को लेकर उठ रहे सवालों पर स्थिति साफ हो सके।

ईओ के साथ निरीक्षण से लेकर सरकारी बैनर तक
राकेश जायसवाल की नगर पालिका में कथित सक्रियता को लेकर इससे पहले भी सवाल उठते रहे हैं। निर्माण कार्यों के निरीक्षण में ईओ के साथ उनकी मौजूदगी, मुख्यमंत्री की वर्चुअल बैठक में निर्वाचित अध्यक्ष के स्थान पर उनकी उपस्थिति तथा विकास कार्यों के शिलापट्टों पर अध्यक्ष के नाम के साथ उनका नाम दिखाई देने को लेकर चर्चाएं सामने आती रही हैं।
अब आधिकारिक कार्यक्रम के बैनर में उनकी तस्वीर सामने आने के दावे ने पूरे मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
सवाल सीधा है—अध्यक्ष के पति के रूप में दिखाई देने वाली भूमिका यदि केवल पारिवारिक है, तो सरकारी कार्यक्रम के बैनर में तस्वीर किस हैसियत से? और यदि कोई आधिकारिक भूमिका है, तो उसका आदेश और पदनाम क्या है?
2012 का शासनादेश फिर बना चर्चा का केंद्र
उत्तर प्रदेश नगर विकास विभाग की वेबसाइट पर 10 अक्टूबर 2012 का शासनादेश संख्या 3905/नौ-1-2012-8ई/1995 दर्ज है। शासनादेश का विषय स्थानीय नगर निकायों में निर्वाचित महिला पदाधिकारियों के पति अथवा संबंधियों के निकाय के प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप से संबंधित दिशा-निर्देश है।
इसी वजह से कुशीनगर पालिका में उठ रहे सवालों के बीच अब इस शासनादेश की प्रासंगिकता पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि किसी व्यक्ति की तस्वीर मात्र से शासनादेश का उल्लंघन स्वतः सिद्ध नहीं होता; इसके लिए संबंधित आदेश, भूमिका और परिस्थितियों की आधिकारिक जांच आवश्यक होगी।
बैनर किसने बनाया और मंजूरी किसने दी?
अब जांच के दायरे में सबसे अहम सवाल बैनर तैयार कराने और उसे स्वीकृति देने वाले स्तर का है।
फोटो लगाने का निर्देश किसने दिया?
बैनर किस एजेंसी अथवा व्यक्ति ने तैयार कराया?
किस अधिकारी ने इसकी स्वीकृति दी?
क्या ईओ ने बैनर को अनुमोदित किया?
क्या किसी सरकारी अभिलेख में राकेश जायसवाल को कार्यक्रम का अधिकृत प्रतिनिधि बताया गया है?
इन सवालों का जवाब दस्तावेजों के साथ सामने आने पर ही तस्वीर की वास्तविक प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सरकारी बैनर है तो जवाबदेही भी सरकारी होनी चाहिए
नगर पालिका के कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की भूमिका निर्धारित होती है। ऐसे में यदि किसी गैर-निर्वाचित व्यक्ति की तस्वीर आधिकारिक प्रचार सामग्री में लगाई जाती है, तो उसके पीछे का आदेश और प्रशासनिक आधार स्पष्ट होना चाहिए।
अब निगाह नगर पालिका प्रशासन के जवाब पर है। क्या पालिका बैनर की स्वीकृति और संबंधित आदेश सार्वजनिक करेगी? या फिर सरकारी बैनर पर दिखाई दे रही तस्वीर भी बाकी सवालों की तरह जवाब की प्रतीक्षा करती रहेगी?
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता।
