
फेडरेशन ने 5 प्रस्तावों पर जताई सहमति, सूचना विभाग से लेकर अफसरों के साथ संवाद की पहल—अब देखना है फैसले फाइलों से निकलकर जमीन पर कब उतरते हैं
कसया, कुशीनगर। 04 अक्टूबर।
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता।
हिन्दी समाचार पत्रों को अक्सर लोकतंत्र की जमीनी आवाज कहा जाता है, लेकिन सवाल यह है कि जो अखबार गांव-गांव की समस्याएं उठाते हैं, उनकी अपनी समस्याएं आखिर कौन उठाएगा? इसी सवाल को केंद्र में रखते हुए ऑल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूजपेपर फेडरेशन की महत्वपूर्ण संपादकीय बैठक रविवार को कसया स्थित कैम्प कार्यालय में आयोजित हुई। बैठक में पूर्वांचल के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे करीब 12 संपादकों एवं प्रतिनिधियों ने छोटे समाचार पत्रों के अस्तित्व, सम्मान, सुरक्षा और सरकारी सुविधाओं को लेकर गंभीर मंथन किया।
बैठक में संपादकों ने दो टूक कहा कि डिजिटल मीडिया के तेज दौर में भी हिन्दी समाचार पत्र आज गांव, गरीब, किसान और आम जनता की आवाज बने हुए हैं। बावजूद इसके सरकारी व्यवस्था में कई बार इन्हें वह सम्मान और सहयोग नहीं मिल पाता, जिसकी अपेक्षा की जाती है। सवाल उठाया गया कि जब खबरों के लिए हिन्दी अखबार प्रशासन की चौखट तक पहुंचते हैं, तो उनकी अपनी आवाज सुनने के लिए प्रशासनिक चौखट इतनी ऊंची क्यों हो जाती है?
बैठक में सर्वसम्मति से पांच महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए।
पहला, संगठन से जुड़े सक्रिय संपादकों के लिए फेडरेशन की ओर से आईडी कार्ड जारी करने का निर्णय लिया गया, ताकि फील्ड में उनकी पहचान और संगठनात्मक प्रतिनिधित्व स्पष्ट हो सके।
दूसरा, सूचना विभाग में सूचना अधिकारी एवं संपादकों के बीच नियमित संवाद और बैठक सुनिश्चित कराने पर सहमति बनी। उद्देश्य विज्ञापन, प्रेस संबंधी सूचनाओं तथा अन्य समस्याओं पर सीधे संवाद स्थापित करना है।
तीसरा, सूचना विभाग के माध्यम से छोटे एवं मझोले समाचार पत्रों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी तथा लाभ सुनिश्चित कराने के लिए संगठन स्तर से पहल करने का निर्णय हुआ।
चौथा, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और मुख्य विकास अधिकारी के साथ संपादकों की संयुक्त परिचय एवं संवाद बैठक कराने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि प्रशासन और प्रेस के बीच दूरी कम हो तथा जमीनी पत्रकारिता से जुड़े मुद्दों पर सीधा संवाद हो सके।
पांचवां और सबसे अहम फैसला, संगठन से जुड़े किसी संपादक के साथ अभद्रता, हमला, दबाव अथवा कथित झूठे मुकदमे जैसी स्थिति उत्पन्न होने पर फेडरेशन द्वारा उसके पक्ष में संगठनात्मक, सामाजिक और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी स्तर पर सहयोग करने की बात कही गई।
बैठक में अध्यक्ष सतीश कुमार गुप्ता मंत्री इमामुद्दीन अंसारी मुसाफिर अंसारी, डॉ. अरविंद कुमार शर्मा, जगदीश शर्मा, डॉ. मोहम्मद अय्यूब, गौरी शंकर गुप्ता, परवेज हिंदुस्तानी, धर्मेंद्र कुमार पांडेय अबरारुल हक़ कृष्ण बिहारी गुप्ता सहित अन्य संपादक एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने प्रस्तावों पर अपनी सहमति व्यक्त की।
अब असली परीक्षा प्रस्तावों की नहीं, उनके क्रियान्वयन की है। देखना होगा कि संपादकों की यह आवाज बैठक कक्ष की दीवारों से बाहर निकलकर सूचना विभाग और प्रशासनिक गलियारों तक कितनी मजबूती से पहुंचती है।
बैठक के बाद सामूहिक फोटो के साथ चाय पर चर्चा हुई और फेडरेशन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया।
