
प्रमुख सचिव ऊर्जा और यूपीपीसीएल अध्यक्ष तक पहुंची शिकायत, विजिलेंस जांच से लेकर स्टॉक के भौतिक सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड की तकनीकी पड़ताल की उठी मांग
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। बिजली विभाग के पडरौना विद्युत उपकेंद्र स्थित स्टोर में कथित अनियमितताओं को लेकर अब जवाबदेही और पारदर्शिता का सवाल शासन के दरवाजे तक पहुंच गया है। आउटसोर्सिंग कर्मचारी अमित सिंह को स्टोर का प्रभार सौंपे जाने और स्टोर प्रभारी योगेन्द्र कुमार गुप्ता की यूजर आईडी-पासवर्ड उपलब्ध कराए जाने के आरोपों को लेकर भ्रष्टाचार अन्वेषण एवं मानवाधिकार परिषद ने प्रमुख सचिव ऊर्जा तथा उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के अध्यक्ष को शिकायत भेजकर स्वतंत्र जांच की मांग की है। मामला अब केवल स्टोर की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि विभागीय नियमों, सामग्री के हिसाब-किताब और डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े कर रहा है।

स्टोर का प्रभार किस आदेश से सौंपा गया?
शिकायत में सबसे अहम सवाल यह उठाया गया है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारी अमित सिंह को स्टोर संचालन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी किस नियम और किस सक्षम अधिकारी के आदेश के तहत सौंपी गई? क्या इसके लिए लिखित अनुमति ली गई थी? यदि अनुमति थी, तो संबंधित आदेश और जिम्मेदारी तय करने वाले अधिकारियों का विवरण सामने आना चाहिए। वहीं, स्टोर प्रभारी योगेन्द्र कुमार गुप्ता की यूजर आईडी और पासवर्ड के कथित इस्तेमाल की परिस्थितियों की भी जांच कराने की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
🔴 डिजिटल सिस्टम की तकनीकी जांच पर जोर
शिकायतकर्ता ने संबंधित यूजर आईडी की लॉगिन हिस्ट्री, ऑडिट ट्रेल, आईपी एड्रेस, डिवाइस विवरण और यूजर एक्टिविटी लॉग सुरक्षित कर तकनीकी जांच कराने का अनुरोध किया है। जांच के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि संबंधित आईडी से कब लॉगिन हुआ, किन गतिविधियों को अंजाम दिया गया और सिस्टम का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया। यदि अनधिकृत इस्तेमाल सामने आता है, तो उसकी प्रकृति और जिम्मेदारी निर्धारित करने की मांग की गई है। साथ ही, जांच पूरी होने तक डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है।
🔴 स्टॉक रजिस्टर से लेकर गेट पास तक की पड़ताल की मांग
विद्युत स्टोर में रखी सामग्री का वास्तविक हिसाब सामने लाने के लिए स्टॉक रजिस्टर, सामग्री प्राप्ति एवं निर्गमन रजिस्टर, मटेरियल रिक्विजिशन, गेट पास और डिजिटल अभिलेखों का स्वतंत्र मिलान कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि दस्तावेजों और मौके पर उपलब्ध सामग्री का भौतिक सत्यापन होने से किसी संभावित अंतर या अनियमितता की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। यदि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में कोई अंतर मिलता है, तो उसकी वजह और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
देवरिया और गोरखपुर स्टोर के प्रभार पर भी उठे सवाल
शिकायत में योगेन्द्र कुमार गुप्ता से संबंधित देवरिया और गोरखपुर विद्युत स्टोर के अतिरिक्त प्रभार, निरीक्षण तथा नियंत्रण संबंधी आदेशों की भी पड़ताल कराने का अनुरोध किया गया है। मांग है कि संबंधित आदेशों, कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि स्टोर संचालन की व्यवस्था किन नियमों के तहत संचालित हो रही थी।

विजिलेंस जांच से तय हो जवाबदेही
भ्रष्टाचार अन्वेषण एवं मानवाधिकार परिषद ने स्थानीय स्तर पर सीमित जांच के बजाय यूपीपीसीएल विजिलेंस/एनफोर्समेंट से स्वतंत्र एवं तकनीकी जांच कराने की मांग की है। शिकायत के साथ संबंधित समाचार-पत्रों में प्रकाशित खबरों की कटिंग भी संदर्भ के रूप में संलग्न करने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप प्रमाणित होने पर लागू विभागीय नियमों और विधिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई तथा जांच की प्रगति से अवगत कराने का अनुरोध किया है।
अब निगाहें शासन के फैसले पर
पडरौना विद्युत स्टोर से जुड़े इस प्रकरण में कई सवालों का जवाब मिलना बाकी है—क्या प्रभार सौंपने का सक्षम आदेश मौजूद है? क्या यूजर आईडी का इस्तेमाल अधिकृत तरीके से हुआ? क्या स्टॉक और डिजिटल रिकॉर्ड का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाएगा? इन सवालों पर अटकलों के बजाय दस्तावेजी साक्ष्य, तकनीकी जांच और निष्पक्ष कार्रवाई ही स्थिति साफ कर सकती है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का पक्ष सामने आने तथा शासन स्तर पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद ही प्रकरण की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
