
पट्टा आवंटन से लेकर कथित दोबारा कब्जे तक कई सवाल; लेखपाल की रिपोर्ट, अधिकारियों की मंजूरी और जमीन के अभिलेखों की निष्पक्ष जांच जरूरी
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। सरकारी जमीन पर पात्रता के मानकों का पालन हुआ या नियमों को दरकिनार कर पट्टा आवंटित कर दिया गया? अगर पट्टा नियमों के विपरीत था और प्रशासन ने कब्जा हटवाया था, तो दोबारा कब्जे की नौबत कैसे आई? पडरौना विकास खंड के भिसवा लाला गांव के ग्राम प्रधान रफीक अंसारी के नाम सोहरौना गांव में सरकारी भूमि के कथित पट्टा आवंटन को लेकर ऐसे ही सवाल उठ रहे हैं। मामला केवल एक व्यक्ति को पट्टा मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जांच में राजस्व विभाग की भूमिका, अभिलेखों की सत्यता और सरकारी जमीन को कब्जामुक्त रखने की जिम्मेदारी भी सामने आनी चाहिए।
दूसरे गांव में पट्टा, पात्रता का आधार क्या था?
उठ रहे सवालों के केंद्र में सबसे अहम मुद्दा यह है कि भिसवा लाला के ग्राम प्रधान रफीक अंसारी को सोहरौना गांव में सरकारी भूमि का पट्टा किन नियमों और पात्रता के आधार पर आवंटित किया गया। क्या नियमानुसार प्रस्ताव पारित हुआ था? क्या संबंधित भूमि पट्टे के लिए आवंटन योग्य थी? पात्रता का सत्यापन किस राजस्वकर्मी ने किया और उसकी रिपोर्ट में क्या तथ्य दर्ज किए गए? सक्षम अधिकारी ने किन दस्तावेजों के आधार पर स्वीकृति दी?
इन सवालों का जवाब केवल मौखिक स्पष्टीकरण से नहीं, बल्कि पट्टा आवंटन की मूल पत्रावली, राजस्व अभिलेखों, प्रस्ताव और स्वीकृति आदेश की जांच से ही मिल सकता है।
बेदखली के बाद दोबारा कब्जे का आरोप, जिम्मेदार कौन?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित पट्टे को तत्कालीन उपजिलाधिकारी द्वारा नियमविरुद्ध मानते हुए कब्जा हटवाए जाने की बात कही जा रही है। आरोप यह भी है कि इसके बाद संबंधित भूमि पर दोबारा कब्जा कर लिया गया। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि और आदेशों का सत्यापन होना अभी आवश्यक है।
यदि सरकारी जमीन से बेदखली की कार्रवाई वास्तव में हुई थी, तो यह पता लगाना जरूरी है कि उसके बाद जमीन की वर्तमान स्थिति क्या है। क्या राजस्व विभाग ने दोबारा कब्जे की जांच की? क्या मौके का निरीक्षण हुआ? यदि कब्जा दोबारा हुआ, तो संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की? सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले तंत्र की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
लेखपाल मार्कण्डेय मणि की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस प्रकरण में संबंधित लेखपाल मार्कण्डेय मणि की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत को जांच के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। इसलिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि पट्टे की संस्तुति किसने की, मौके की रिपोर्ट किसने तैयार की और पात्रता के सत्यापन में किन तथ्यों को आधार बनाया गया।
यदि जांच में रिपोर्ट तैयार करने से लेकर स्वीकृति तक किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी भी नियमानुसार तय की जानी चाहिए। आखिर सरकारी भूमि के आवंटन में किसी एक व्यक्ति की पात्रता का सत्यापन पूरी प्रक्रिया की बुनियाद होता है। इस स्तर पर लापरवाही या जानबूझकर गलत रिपोर्ट दिए जाने का प्रमाण मिलता है, तो कार्रवाई भी उसी अनुपात में होनी चाहिए।
रिश्वत और परिजनों के नाम पट्टे के आरोपों की भी पड़ताल जरूरी
सूत्रों के हवाले से पट्टा आवंटन के लिए संबंधित लेखपाल को मोटी रकम दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है। फिलहाल इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि करने वाला साक्ष्य सामने आना जरूरी है। जांच में यह देखा जाना चाहिए कि कहीं किसी प्रकार का अनुचित लेन-देन हुआ या नहीं। आरोप प्रमाणित करने वाले साक्ष्य मिलने पर सक्षम भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी से नियमानुसार जांच कराने पर भी विचार किया जा सकता है।
ग्रामीणों की ओर से यह आरोप भी उठाया जा रहा है कि रफीक अंसारी के पिता और भाई के नाम पर भी सरकारी भूमि के पट्टे हुए हैं। इन दावों की सत्यता संबंधित अभिलेखों के परीक्षण से ही स्पष्ट होगी। यदि ऐसे पट्टे मौजूद हैं, तो उनकी वैधता और आवंटन प्रक्रिया की भी नियमानुसार जांच होनी चाहिए।
एंटी भू-माफिया अभियान के बीच प्रशासन से जवाबदेही की मांग
सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त रखना और नियमविरुद्ध आवंटन की जांच करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे में सोहरौना की भूमि के मामले में सबसे पहले भूमि की वास्तविक श्रेणी, पट्टे की वैधता, कथित बेदखली के आदेश और वर्तमान कब्जे की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
अब बड़ा सवाल यही है कि सरकारी जमीन के इस कथित पट्टा प्रकरण की निष्पक्ष जांच कब होगी और अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई कब की जाएगी? प्रशासन को तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि सरकारी भूमि के आवंटन में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी व्यक्ति को नियमों से ऊपर होने का संदेश न मिले।
नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त किया जाना शेष है। संबंधित ग्राम प्रधान, लेखपाल एवं राजस्व विभाग का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
