
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
देवरिया। जिले के बरहज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक प्रसूता की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। प्रसूता अनीता बास्फोर की मौत से आक्रोशित परिजनों ने बुधवार को अस्पताल परिसर में शव रखकर जमकर प्रदर्शन किया और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान महिला की हालत बिगड़ने लगी थी, लेकिन समय रहते उचित उपचार और गंभीरता नहीं दिखाई गई। आरोप यह भी लगाया गया कि अस्पताल कर्मियों और नर्सिंग स्टाफ की कथित लापरवाही के कारण स्थिति और बिगड़ गई। बाद में महिला को रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया। गुस्साए परिजनों ने सवाल उठाया कि आखिर सरकारी अस्पतालों में मरीजों की जिंदगी भगवान भरोसे कब तक चलती रहेगी? जब प्रसव जैसी संवेदनशील चिकित्सा व्यवस्था में भी लापरवाही के आरोप लग रहे हैं, तो आम जनता भरोसा किस पर करे?
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मामले की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
यह घटना केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। हर घटना के बाद जांच और आश्वासन का सिलसिला तो शुरू हो जाता है, लेकिन यदि जिम्मेदारी तय नहीं होगी तो ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति कैसे रुकेगी?
अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रसूता की मौत महज दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी या फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की कथित लापरवाही ने एक और परिवार की खुशियां छीन लीं? इसका जवाब जांच रिपोर्ट ही दे सकेगी, जिसका इंतजार पूरा क्षेत्र कर रहा है।
