

विलेज फास्ट टाइम्स न्यूज नेटवर्क
कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। जनपद के विशुनपुरा थाना क्षेत्र के शाहपुर उच्चकी पट्टी गांव में सोमवार की रात हुई सिलसिलेवार चोरियों ने पुलिस की रात्रि गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेखौफ चोरों ने अंधेरे का फायदा उठाते हुए एक दुकान सहित छह घरों को निशाना बनाया और लाखों रुपये की नकदी, सोने-चांदी के जेवरात तथा मोबाइल फोन समेटकर फरार हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में भय, आक्रोश और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
ग्रामीणों के अनुसार चोर छत के रास्ते घरों में घुसे। उन्होंने करकट हटाकर अंदर प्रवेश किया और बड़ी ही सुनियोजित तरीके से कीमती सामान समेट लिया। सबसे बड़ी वारदात सायदा खातून के घर बताई जा रही है, जहां पीड़ित परिवार ने करीब 10 लाख रुपये के सामान की चोरी का दावा किया है। इसके अलावा अन्य पांच घरों और एक दुकान से भी लाखों रुपये मूल्य की संपत्ति चोरी होने की जानकारी सामने आई है।
इस घटना ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं जिनका जवाब ग्रामीण पुलिस प्रशासन से मांग रहे हैं। गांव के चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद चोर बेखौफ होकर एक के बाद एक घरों को निशाना बनाते रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि कैमरे केवल दिखावे तक सीमित हैं और जरूरत पड़ने पर उनका कोई उपयोग नहीं हो सका।
सबसे बड़ा प्रश्न यह भी उठ रहा है कि यदि रात्रि गश्त प्रभावी होती तो क्या चोर इतने लंबे समय तक गांव में सक्रिय रह पाते? आखिर एक ही रात में लगातार छह घरों और एक दुकान में चोरी हो जाना सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता नहीं तो और क्या है?
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों ने पुलिस प्रशासन से तत्काल चोरों की पहचान कर गिरफ्तारी, चोरी गए सामान की बरामदगी तथा गांव और आसपास लगे खराब सीसीटीवी कैमरों को अविलंब दुरुस्त कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो अपराधियों के हौसले और बुलंद होंगे।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस इस चुनौतीपूर्ण वारदात का खुलासा कितनी जल्दी करती है और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने में कितनी सफल होती है।
आपकी नजर में इतनी बड़ी चोरी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन—बेखौफ अपराधी, लापरवाह सुरक्षा व्यवस्था या निष्क्रिय निगरानी तंत्र? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।क्षा व्यवस्था पर किसकी नजर?
