

किसान दिवस में गूंजीं किसानों की समस्याएं, ओवररेटिंग, टैगिंग, बिजली, सिंचाई, आवारा पशु, भूमि पैमाइश और फार्मर रजिस्ट्री पर जिलाधिकारी ने अधिकारियों को लगाई कड़ी फटकार
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद में किसानों से जुड़ी समस्याओं को लेकर प्रशासन ने इस बार बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित मासिक किसान दिवस केवल औपचारिक बैठक बनकर नहीं रह गया, बल्कि किसानों की पीड़ा, शिकायतों और सरकारी व्यवस्थाओं की हकीकत खुलकर सामने आई। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने साफ शब्दों में कहा कि किसानों की मेहनत पर डाका डालने वाले खाद माफिया, ओवररेटिंग करने वाले विक्रेता तथा टैगिंग जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई होगी और प्रशासन स्वयं इसकी निगरानी करेगा।
बैठक की शुरुआत गत किसान दिवस में प्राप्त शिकायतों की समीक्षा से हुई। संबंधित विभागों से एक-एक बिंदु पर जवाब तलब किया गया और यह जानने का प्रयास किया गया कि किसानों की शिकायतों का धरातल पर कितना समाधान हुआ। जिलाधिकारी ने स्पष्ट संकेत दिए कि केवल कागजी निस्तारण से काम नहीं चलेगा, बल्कि वास्तविक समाधान ही प्रशासन की प्राथमिकता होगा।
बैठक के दौरान किसानों ने खुलकर अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। सबसे अधिक नाराजगी खाद की कालाबाजारी, निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूले जाने तथा जबरन अन्य उत्पादों की टैगिंग को लेकर दिखाई दी। किसानों ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर यूरिया और अन्य उर्वरकों की बिक्री नियमों के विपरीत की जा रही है, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।
इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने कृषि विभाग और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनपद में व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया जाए। जहां कहीं भी कालाबाजारी, ओवररेटिंग अथवा टैगिंग जैसी शिकायतें सत्य पाई जाएं, वहां बिना किसी दबाव के कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों के लिए प्रशासन की नीति पूरी तरह “जीरो टॉलरेंस” की होगी।
किसानों ने आवारा पशुओं की समस्या भी प्रमुखता से उठाई। उनका कहना था कि रात-दिन खेतों की रखवाली करने के बावजूद फसलें सुरक्षित नहीं हैं। इस पर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि निराश्रित बछड़ों एवं आवारा पशुओं को अभियान चलाकर गौशालाओं में भेजा जाएगा, ताकि किसानों की फसलों को नुकसान से बचाया जा सके।
बैठक में बिजली व्यवस्था को लेकर भी किसानों की नाराजगी सामने आई। कई किसानों ने जर्जर विद्युत तारों, बार-बार बिजली बाधित होने तथा सिंचाई के समय पर्याप्त विद्युत आपूर्ति न मिलने की शिकायत की। जिलाधिकारी ने अधिशासी अभियंता विद्युत को निर्देशित किया कि खराब और जर्जर तारों को प्राथमिकता के आधार पर बदला जाए तथा कृषि कार्यों के लिए निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जाए।
सिंचाई व्यवस्था और नलकूप कनेक्शन का मुद्दा भी बैठक में जोरदार ढंग से उठा। किसानों ने बताया कि कई क्षेत्रों में समय से पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण खेती प्रभावित हो रही है। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि सिंचाई सुविधाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए।
भूमि पैमाइश से जुड़े मामलों पर भी प्रशासन ने गंभीरता दिखाई। किसानों ने शिकायत की कि कई मामलों में पैमाइश लंबित रहने से विवाद बढ़ रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित तहसीलदारों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों का त्वरित एवं निष्पक्ष निस्तारण कराया जाए, ताकि अनावश्यक विवादों पर रोक लग सके।
बैठक के दौरान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का मुद्दा भी उठा। संबंधित अधिकारियों ने जानकारी दी कि रुधवलिया क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के पास किसी प्रकार का अवैध अवरोध या चिलवन नहीं बनने दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं एवं जागरूकता कार्यक्रमों में किसानों की कम भागीदारी पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि अब गांव-गांव तक कृषि मेलों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा तथा महिला किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।
बैठक में यू.पी. नेडा कार्यालय से जुड़ी शिकायतों पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विभाग जनपद में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है तथा वर्तमान में संबंधित अधिकारी को उसका अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। उन्होंने अधिकारियों को जनता के बीच बेहतर समन्वय और सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
फार्मर रजिस्ट्री को लेकर जिलाधिकारी ने किसानों को विशेष रूप से जागरूक किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में खाद, बीज, कृषि अनुदान और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। जिन किसानों के आधार, नाम अथवा राजस्व अभिलेखों में विसंगति है, वे तत्काल संशोधन कराकर अपनी रजिस्ट्री पूर्ण कर लें, अन्यथा भविष्य में योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
जिलाधिकारी ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिया कि किसान केवल दफ्तरों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर न हों। हर विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर समयबद्ध ढंग से समस्याओं का समाधान करे। शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र किसान तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), जिला विकास अधिकारी, उप कृषि निदेशक, जिला उद्यान अधिकारी, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, अग्रणी जिला प्रबंधक, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक (सहकारिता), अधिशासी अभियंता विद्युत, फसल बीमा से जुड़े अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
प्रतिक्रिया :
किसान दिवस की बैठक में जिलाधिकारी का सख्त रुख निश्चित रूप से किसानों के लिए राहत भरा संदेश माना जा सकता है। हालांकि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या खाद की कालाबाजारी, ओवररेटिंग, टैगिंग, बिजली, सिंचाई और भूमि पैमाइश जैसे मुद्दों पर दिए गए निर्देश वास्तव में धरातल पर उतरेंगे या फिर यह बैठक भी केवल आश्वासनों तक सीमित रह जाएगी। किसान अब घोषणाओं से अधिक कार्रवाई देखना चाहते हैं। यदि प्रशासन अपने निर्देशों का ईमानदारी से पालन कराता है तो इससे न केवल किसानों का भरोसा मजबूत होगा बल्कि कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
