
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
विशेष संवाददाता
कुशीनगर। सीमावर्ती नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र इन दिनों लगातार हो रही बाइक चोरी की घटनाओं को लेकर सुर्खियों में है। पिछले लगभग दो महीनों में सात से अधिक मोटरसाइकिल चोरी होने की घटनाएं सामने आने के बावजूद अपराधियों तक पुलिस की पहुंच न बन पाना आम लोगों के बीच चिंता और असंतोष का विषय बन गया है। चोरी की बढ़ती वारदातों के बीच अब लोग यह सवाल खुलकर पूछने लगे हैं कि आखिर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था किसके भरोसे चल रही है? यदि अपराधी लगातार सक्रिय हैं तो उनकी गिरफ्तारी और चोरी गई मोटरसाइकिलों की बरामदगी में अपेक्षित सफलता क्यों नहीं मिल रही?
इन घटनाओं के बीच एक मामला सबसे अधिक चर्चा में है। नेबुआ रायगंज निवासी गोविंद गुप्ता का दावा है कि उनकी चोरी हुई मोटरसाइकिल नेपाल में मिली। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि बाइक के साथ एक संदिग्ध व्यक्ति भी पकड़ा गया था और इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। आगे यह भी आरोप लगाया गया कि नेपाल पुलिस के सहयोग से वाहन भारत लाया गया, लेकिन बाद की कार्रवाई को लेकर कई प्रश्न खड़े हो गए। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनकी तहरीर बदलवाई गई और मुकदमा अज्ञात के विरुद्ध दर्ज किया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है तथा पुलिस की ओर से इस संबंध में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
यदि चोरी की बाइक वास्तव में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार नेपाल तक पहुंची थी, तो यह मामला सामान्य वाहन चोरी से कहीं अधिक गंभीर माना जाएगा। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में संभावित संगठित वाहन चोर गिरोह, सीमापार नेटवर्क तथा अपराध की श्रृंखला की गहन जांच आवश्यक हो जाती है। यदि अपराधी अंतरराष्ट्रीय सीमा का लाभ उठा रहे हैं, तो यह केवल स्थानीय पुलिसिंग का नहीं बल्कि व्यापक सुरक्षा व्यवस्था का भी विषय है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब एक पीड़ित स्वयं अपनी मोटरसाइकिल का सुराग नेपाल तक तलाश सकता है, तब पुलिस की खुफिया व्यवस्था, तकनीकी निगरानी और अपराध नियंत्रण तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई होती तो शायद अपराधियों के हौसले इतने बुलंद नहीं होते।
क्षेत्र के विभिन्न गांवों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों से लगातार बाइक चोरी की घटनाओं ने आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। कई पीड़ितों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें केवल आश्वासन मिला, लेकिन जांच और बरामदगी के स्तर पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। यही कारण है कि लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि अपराधियों में कानून का भय कम होता जा रहा है और वे बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के बाद पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि बाजार, बैंक, पेट्रोल पंप, विवाह स्थल और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर नियमित गश्त, संदिग्ध व्यक्तियों की जांच तथा प्रभावी निगरानी की जाती, तो कई घटनाओं को रोका जा सकता था। लोगों का कहना है कि अपराध होने के बाद औपचारिक कार्रवाई दिखाई देती है, जबकि अपराध की रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रियता की आवश्यकता है।
कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण करना तथा आम जनता में सुरक्षा का विश्वास कायम रखना थाना नेतृत्व की प्रमुख जिम्मेदारी है। ऐसे में लगातार बढ़ती चोरी की घटनाएं, सीमित बरामदगी और पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल स्वाभाविक रूप से थाना स्तर की कार्यप्रणाली की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
क्षेत्रीय नागरिकों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि पिछले दो महीनों में हुई सभी बाइक चोरी की घटनाओं की विशेष जांच कराई जाए, यदि किसी संगठित गिरोह की संलिप्तता है तो उसका पर्दाफाश किया जाए तथा नेपाल कनेक्शन वाले चर्चित प्रकरण में लगाए गए आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए। लोगों का कहना है कि पारदर्शी जांच, सख्त कार्रवाई, प्रभावी गश्त और समयबद्ध खुलासा ही आम जनता का डगमगाता विश्वास दोबारा कायम कर सकता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पुलिस इन सवालों का जवाब केवल बयान से देगी या ठोस कार्रवाई से।
