
कुशीनगर, 15 जुलाई (विलेज फास्ट टाइम्स)। जनपद में बाल श्रम के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बुधवार को रामकोला कस्बे में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक प्रतिष्ठित बिरयानी दुकान से बाल श्रमिक को मुक्त कराया। श्रम विभाग, पुलिस विभाग एवं चाइल्ड लाइन की संयुक्त टीम की इस कार्रवाई से बाल श्रम कराने वाले प्रतिष्ठानों में हड़कंप मच गया है।
बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 (यथासंशोधित 2016) के प्रभावी अनुपालन के लिए चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत संयुक्त टीम ने रामकोला स्थित मेसर्स गोलू बिरयानी प्रतिष्ठान पर औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान वहां एक नाबालिग बालक कार्य करता हुआ मिला। टीम ने तत्काल उसे श्रम से मुक्त कराते हुए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और बाल कल्याण समिति, कुशीनगर के समक्ष प्रस्तुत कर दिया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मुक्त कराए गए बालक के शैक्षिक, सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास की प्रक्रिया तत्काल शुरू कर दी गई है, ताकि उसे दोबारा बाल श्रम की कुप्रथा का शिकार न होना पड़े। वहीं संबंधित सेवायोजक को नोटिस जारी कर उसके विरुद्ध बाल श्रम कानून के तहत विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी अलंकृता उपाध्याय ने दो टूक शब्दों में कहा कि बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, मजदूरी के औजार नहीं। बाल श्रम कराना न केवल अमानवीय कृत्य है, बल्कि यह गंभीर दंडनीय अपराध भी है। उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि यदि कहीं भी बच्चों से मजदूरी कराई जाती दिखाई दे तो उसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दें।
उन्होंने बताया कि बाल श्रम कराते पाए जाने पर दोषी व्यक्ति के विरुद्ध 6 माह से 2 वर्ष तक के कारावास तथा 20 हजार से 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
इस संयुक्त अभियान में श्रम प्रवर्तन अधिकारी अलंकृता उपाध्याय, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के प्रभारी निरीक्षक चन्द्रभूषण तथा चाइल्ड लाइन के मानस, आदित्य एवं अभिषेक कुमार श्रीवास्तव शामिल रहे। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आगामी दिनों में जिले भर में ऐसे औचक निरीक्षण और तेज किए जाएंगे, जिससे हर बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और शिक्षित बचपन सुनिश्चित किया जा सके।
